शिव-पार्वती विवाह में जन्म से पहले कैसे हुई भगवान गणेश की पूजा? रामचरितमानस में छिपा जवाब
शिव-पार्वती के विवाह में गणेश पूजा कैसे संभव हुई, इस रहस्य को गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में उजागर किया है।

शिव-पार्वती विवाह में गणेश जी की भूमिका

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान गणेश जिन्हें हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश की उत्पत्ति माता पार्वती के मैल के संग्रह से बताया जाता है।
भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र को लेकर एक कथा यह भी प्रचलित है कि, शिव-पार्वती विवाह के दौरान सबसे पहले गणेश पूजा हुई थी। इस बात को सुनने के बाद कई लोगों के मन में पहला सवाल यही आता है कि, उस समय जब भगवान गणेश की उत्पत्ति ही नहीं हुई थी, तो गणेश पूजा का रहस्य क्या है?
इस रहस्य को उजागर किया है गोस्वामी तुलसीदास जी ने, रामचरित मानस के बालकांड के 100वें दोहे में वे कहते हैं कि,
मुनि अनुशासन गणपति हि पूजेहु शंभु भवानि।
कोउ सुनि संशय करै जनि सुर अनादि जिय जानि।
इस श्लोक में बताया गया है कि, शिव विवाह के दौरान 'ब्रह्मज्ञानी' ऋषियों के कहने पर शिव-पार्वती ने भगवान गणेश की पूजा विधि-विधान से की थी। अब यहां साधारण सोच यह कहती है कि, गणेश जी तो भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं, तो शादी के समय उनका पूजन कैसे संभव हुआ? इसमें किसी भी तरह की हैरान नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भगवान गणेश को अनादि (जिसका कोई आदि या शुरुआत न हो) कहा जाता है। भगवान गणेश काल और भौतिक शरीर के बंधनों से परे हैं।
भगवान गणेश महज पुत्र रूप में ही नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के पहले और परम अनादि तत्व के रूप में विद्यमान है, जो हर शुभ कार्य के प्रारंभ में विघ्नहर्ता बनकर पूजे जाते हैं। भगवान गणेश उस परम ऊर्जा के प्रतीक हैं, जो हर मंगल कार्य के आरंभ के नींव बनते हैं।
गणेश जी को वैदिक देवता भी कहा जाता है। वेदों में इनका नाम गणेश जी के स्थान पर 'गणपति' या 'ब्रह्मणस्पति' बताया जाता है। ऋग्वेद और यजुर्वेद के मंत्रों में भी गणेश जी के उपर्युक्त नामों का विवरण देखने को मिलता है।

भगवान गणेश क्यों हैं विघ्नहर्ता?
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। जहां गणेश जी निवास करते हैं, वहीं रिद्धि और सिद्धि भी रहती हैं, जो विवेक और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। जबकि शुभ और लाभ घर में शांति और सौभाग्य लाने का काम करते हैं।
जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रत्येक बुधवार को भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। उन्हें दूर्वा और मोदक का भोग अति प्रिय है।
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