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JCB से विसर्जन और गंदे घाट! प्रेमानंद महाराज ने बताया बप्पा की विदाई का सही तरीका, वरना होगी दुर्गति

Published: Mon, 21 Sep 2026 11:42 AM (IST)

संत प्रेमानंद महाराज ने अपमानजनक गणपति विसर्जन (Ganesh Visarjan 2026) विधियों की आलोचना की है। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों के उपयोग ...और पढ़ें

गणेश विसर्जन को लेकर प्रेमानंद महाराज के दिशानिर्देश

गणेश विसर्जन को लेकर प्रेमानंद महाराज के दिशानिर्देश

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भारत वर्ष में गणपति बप्पा का स्वागत बेहद ही धूमधाम से किया गया। इस साल भी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर यानी 13 सितंबर 2026 गणेशोत्सव मनाया गया। वहीं, 23 सितंबर 2026, बुधवार अनंत चतुर्दशी के मौके पर गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan 2026) होगा।

अब जैसे-जैसे गणपति बप्पा के विसर्जन का दिन नजदीक आ रहा है, भक्त उनकी विदाई करने की तैयारी में जुट गए हैं। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज जी ने गणपति विसर्जन को लेकर कुछ खास नियमों का जिक्र किया है। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया है कि, बप्पा की विदाई कैसी करनी चाहिए?

विसर्जन के अपमानजनक तरीके पर क्या बोलें प्रेमानंद महाराज

गणेश विसर्जन के मौके पर आए दिन ऐसी कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होती है, जिसमें विसर्जन के दौरान उन्हें नदियों, घाटों और तालाब में फेंक दिया जाता है।

ऐसा करने से भगवान गणेश का अनादर होने के साथ-साथ पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचता है। बाद में जब ये मूर्तियां किनारों पर आती हैं, तो इन्हें बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनों से हटाया जाता है। अपने प्रवचन के दौरान प्रेमानंद महाराज ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि, भगवान गणेश ही नहीं, किसी भी अन्य देवी-देवता की मूर्ति का विसर्जन अपमान जनक तरीके से नहीं करना चाहिए। जो भी लोग भगवान गणेश का विसर्जन गंदे तालाब या घाटों पर जेसीबी की मदद से करते हैं, वो अनजाने में बहुत बड़ा पाप कर रहे हैं।

महाराज जी ने आगे कहा कि, विसर्जन के बाद बप्पा की मूर्ति को जेसीबी की मदद से तोड़ा या रौंदा जा रहा है, तो यह काफी अपमानजनक बात है। ऐसा करने पर विघ्न दूर होने की जगह और अधिक पाप बढ़ जाएगा और दुर्गति का सामना करना पड़ेगा।

अगर आप किसी भी देवी-देवता की मूर्ति की स्थापना कर रहे हैं, तो काफी सम्मानजनक तरीके से उनका विसर्जन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि, घर में ही तालाब या कुंड जैसा कुछ बना लें और इसी में गणपति का विसर्जन करें।

प्रेमानंद महाराज के अनुसार विसर्जन का उचित तरीका

गणपति बप्पा की मूर्ति का विसर्जन सच्चे मन से करने के साथ सम्मान और विधि-विधान से करना चाहिए।

इसके अलावा भगवान गणेश की मूर्ति ऐसी मिट्टी से निर्मित होनी चाहिए, जो पानी के संपर्क में आते ही घुल जाए। कोशिश करें कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्ति पूजा में न इस्तेमाल करें।

इसके अलावा घर के नजदीक ही कोई कुआं, तालाब या सरोवर बनाकर उसमें उचित तरीके से विसर्जन करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।