Ganesh Chaturthi 2026: 'सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची', आप जानते हैं इस प्रसिद्ध गणेश आरती का असली मतलब?
बप्पा की सबसे प्रसिद्ध आरती 'सुखकर्ता दुखहर्ता' का असली मतलब क्या है? गणेश चतुर्थी के मौके पर जानिए इस पावन आरती का बहुत ही आसान मतलब।
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गणेश जी की आरती का सही मतलब (AI-Generated Image)
HighLights
गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश की आरती करने का विधान है
गणेश जी को सुखदाता, विघ्नहर्ता और मनोकामना पूर्ण करने वाला बताया गया है
मराठी में गाई जाने वाली इस आरती का मतलब बेहद खूबसूरत है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी (Ganesha Chaturthi 2026) का त्योहार आते ही हर तरफ बप्पा के जयकारे गूंजने लगते हैं। महाराष्ट्र से लेकर पूरे देश में भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से चतुर्दशी तक गणपति बप्पा की विशेष पूजा होती है। इस पूजा में सबसे ज्यादा गाई जाने वाली आरती 'सुखकर्ता दुखहर्ता' है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मराठी में गाई जाने वाली इस बेहद खूबसूरत आरती का असल मतलब क्या है और इसे किसने लिखा था?
किसने रची थी यह आरती?
इस पावन आरती की रचना समर्थ रामदास स्वामी जी ने की थी। कहा जाता है कि जब वे मोरगांव गए थे, तो वहां भगवान मोरेश्वर (गणेश जी का एक रूप) की मनमोहक मूर्ति देखकर उनका हृदय भक्ति से भर गया था। उसी पल उन्होंने इस आरती की रचना की, जिसमें कुल सात पद हैं।
आरती का आसान हिंदी अर्थ
चलिए, इस आरती के मुख्य पदों के भाव और अर्थ को सरल शब्दों में जानते हैं:
सुख देने वाले और दुख हरने वाले: हे गजानन, आप भक्तों को सुख देते हैं और उनके सारे दुख-दर्द हर लेते हैं। आप हमारे रास्तों की हर रुकावट को दूर करने वाले हैं।
सुंदर रूप और श्रृंगार: आपके सभी अंग बेहद सुंदर हैं। आपके माथे पर सिंदूर और चंदन का टीका सजा है। गले में मोतियों की चमकती हुई माला आपकी शोभा बढ़ा रही है।
मनोकामना पूरी करने वाले: हे मंगलमूर्ति (शुभता के देवता), आपकी जय हो! आपके केवल दर्शन मात्र से ही भक्तों की सारी मुरादें पूरी हो जाती हैं।
गौरी पुत्र की महिमा: हे माता गौरी के लाडले, आपके लिए रत्नों से जड़ा मुकुट है। आपके मस्तक पर कुमकुम और चंदन का लेप है, और चरणों में बजने वाली पायल से मीठी रुनझुन की आवाज आ रही है।
संकटमोचन गजानन: हे पीतांबर धारी (पीले वस्त्र पहनने वाले), आपकी सूंड सीधी है, आप वक्रतुंड हैं और आपकी तीन आंखें हैं। आप संकट के समय हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
भक्तों के तारणहार: जो भी व्यक्ति सच्चे मन और भक्ति-भाव से आपकी शरण में आता है, उसे संतान, धन और जीवन की हर खुशी भरपूर मात्रा में मिलती है।
यहां पढ़ें पूरी आरती
सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव
लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव
शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
श्रेणी गणेश भजन
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