गणेश जी को क्यों इतना प्रिय है लाल सिंदूर? गणेश पुराण की इस पौराणिक कथा में छिपा है रहस्य
जानिए गणेश पुराण के अनुसार श्री गणेश को लाल सिंदूर क्यों प्रिय है, सिंदूरसुर वध की कथा, सिंदूर अर्पित करने के नियम, मंत्र और इसके धार्मिक लाभ।

लाल सिंदूर से क्यों है गणपति बप्पा का गहरा नाता? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणेश पूजा में लाल सिंदूर अर्पित करने का विशेष महत्व है। भगवान गणपति को सिंदूर चढ़ाने से न सिर्फ जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि का वास भी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऋद्धि-सिद्धि के दाता श्री गणेश की पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य अधूरा माना जाता है।
गणेश पुराण के अनुसार पौराणिक कथा
गणेश पुराण के क्रीड़ा खंड में श्री गणेश को सिंदूर प्रिय होने का स्पष्ट वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार, बाल्यावस्था में गणेश जी का सामना 'सिंदूर' नाम के एक अत्यंत शक्तिशाली और अत्याचारी असुर से हुआ। इस दैत्य का नाम सिंदूर इसलिए था क्योंकि उसका रंग एकदम लाल सिंदूर जैसा था।
जब सिंदूर राक्षस का अत्याचार बहुत ज्यादा बढ़ गया, तब गणेश जी ने उससे भयंकर युद्ध किया और उसका वध कर दिया। इसके बाद गणेश जी ने उसके खून को अपने पूरे शरीर पर लगा लिया। माना जाता है कि तभी से गणपति महाराज को लाल सिंदूर अत्यंत प्रिय है और सिंदूर चढ़ाने वाले भक्त पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है।
सिंदूर अर्पित करने के क्या फायदे हैं?
मान्यता है कि नियमित रूप से गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
जिन दंपत्तियों को संतान नहीं है गणेश जी की कृपा से योग्य और स्वस्थ संतान की प्राप्ति होती है।
नौकरी के इंटरव्यू, परीक्षा या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य पर जाने से पहले गणेश जी को सिंदूर अर्पित करने से सफलता के योग बनते हैं।
पूजा विधि और मंत्र
इस विधि से करें गणपति जी की पूजा-
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और उत्तर या ईशान कोण की ओर मुख करके बैठें। प्रतिमा पर जल छिड़कें, गाय के घी का दीपक जलाएं और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद नीचे दिए गए मंत्र का जप करते हुए गणेश जी के मस्तक पर सिंदूर लगाएं:
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥
पूजा के अंत में गणेश जी के चरणों या मस्तक से थोड़ा सा सिंदूर लेकर स्वयं और परिवार के सदस्यों के माथे पर लगाएं, फिर मोदक का भोग लगाकर आरती करें।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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