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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चतुर्थी का चांद देखने के कारण कृष्ण जी पर लगा था ये झूठा आरोप, पढ़ें अद्भुत कथा

Published: Sat, 30 Aug 2025 11:41 AM (IST)

चतुर्थी का चांद देखने (chaturthi moon taboo) की मनाही होती है। जिसके पीछे एक पौराणिक कथा भी मिलती है जिसके ...और पढ़ें

chaturthi moon story in hindi चंद्रमा को गणेश जी से मिला था ये श्राप।
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HighLights

  1. गणेश चतुर्थी के दिन चांद देखने की होती है मनाही।
  2. भगवान गणेश ने दिया था चंद्रमा को आशीर्वाद।
  3. कृष्ण जी को भी करना पड़ा था मिथ्या दोष का सामना।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 27 अगस्त से गणेश महोत्सव की शुरुआत हो चुकी है, जो अनंत चतुर्दशी यानी 6 सितंबर तक मनाया जाएगा। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण (Krishna false accusation) ने भी गलती से चतुर्थी का चांद देख लिया था। जिस कारण उन्हें चोरी के झूठे आरोप का सामना करना पड़ा था। ऐसे में चलिए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी यह कथा।

बड़ी ही अद्भुत थी स्यमन्तक मणि

कथा के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण की नगरी द्वारका में सत्राजित यादव नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसने सूर्य नारायण की आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उसे वरदान के रूप में स्यमन्तक मणि (Syamantaka Mani) दी।

इस मणि की खासियत थी कि यह रोजाना आठ भार सोना दिया करती थी। जब भगवान श्रीकृष्ण को यह बात पता चली, तो उन्होंने हास्य करते हुए उस व्यक्ति से कहा कि यह मणि तुम मुझे दे दो। बाद में सत्राजित ने वह मणि अपने भाई को दे दी। एक दिन जब उसका भाई शिकार करने गया, तो वहां शेर ने उसे मार डाला।

जामवंत जी के ऐसे पहुंची मणि

कालांतर में रीछों के राजा जामवंत जी ने उस शेर को मार डाला और उनसे ही उसे वह मणि प्राप्त हुई। जब कई दिनों तक सत्राजित का भाई शिकार से नहीं लौटा तो, उसे चिंता होने लगी। उसने सोचा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ही मणि प्राप्त करने के लिए उसके भाई को मार डाला। धीरे-धीरे यह अपवाह पूरे नगर में फैल गई।

तब इस झूठा भगवान श्रीकृष्ण (Krishna Legends) उसके भाई को ढूंढने के लिए निकले। इस दौरान कृष्ण जी को पता चला कि मणि जामवंत जी के पास है। जब वह मणि लेने पहुंचे, तो पाया कि इस मणि से जामवंत जी की पुत्री खेल रही है।

इस तरह मिली झूठे आरोप से मुक्ति

स्यमन्तक मणि (Syamantaka Mani legend) को पाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और जामवंत जी के बीच युद्ध हुआ, जो लगभग 21 दिनों तक चला। जब जामवंत, भगवान श्रीकृष्ण को हरा न सके, तब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है, बल्कि भगवान विष्णु के अवतार हैं।

तब जामवंत ने अपनी पुत्री का विवाह भगवान श्रीकृष्ण से करने का प्रस्ताव रखा और उन्हें मणि लौटा दी। इस प्रकार भगवान कृष्ण को मणि की चोरी के झूठे आरोप से मुक्ति मिली।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।