ईश्‍वर तुल्‍य हैं सूर्य 

ब्रह्मवैर्वत पुराण तो सूर्य को परमात्मा स्वरूप मानता है। प्रसिद्ध गायत्री मंत्र भी सूर्य परक ही है। सूर्योपनिषद में सूर्य को ही संपूर्ण जगत की उतपत्ति का एक मात्र कारण निरूपित किया गया है, और उन्ही को संपूर्ण जगत की आत्मा तथा ब्रह्म बताया गया है। आज हम आपको बताते हैं कौन से ग्रह हैं सूर्य के मित्र और कौन है शत्रु।
ये है ग्रहों से रिश्‍ता
सूर्य की चन्द्र के साथ मित्रता है। तो मंगल भी सूर्य का मित्र है। बुध भी सूर्य का संगी है और हमेशा उनके आसपास घूमा करता है। गुरु बृहस्पति सूर्य के परम मित्र है, दोनो के संयोग से जीवात्मा का संयोग माना जाता है। शुक्र यह एक ग्रह है जिसे ज्योतिष में सौंदर्य प्रधान माना गया है, ये सूर्य के साथ सहज है। जबकि शनि सूर्य के पुत्र हैं लेकिन दोनो की आपसी दुश्मनी है। जहां से सूर्य की सीमा समाप्त होती है, वहीं से शनि की सीमा चालू हो जाती है। राहु सूर्य और चन्द्र दोनो का दुश्मन है। जिनकी कुंडली में दोनों साथ होते हैं राहु उन्‍हें विभिन्न समस्याओं से ग्रसित कर देता है। केतु सूर्य से सम रहता है।
 

Posted By: Molly Seth