Bhagwan Kalki Ki Jayanti : पुराणों के अनुसार भगवान कल्कि विष्‍णु जी के दसवें अवतार हैं। कल्कि पुराण के अनुसार इनका जन्म जन्‍म सावन मास के शुक्‍ल पक्ष की संध्या व्यापिनी तिथि में होगा। यह तिथि 5 अगस्त को पड़ रहा है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, भगवान कल्कि का अवतार कलियुग की समाप्ति और सतयुग के संधिकाल में होगा। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु का यह अंतिम अवतार होगा। भगवान विष्णु का यह पहला अवतार है जिसकी पूजा अवतरित होने से पहले शुरू हो गई है। पुराणों में भगवान कल्कि के माता पिता, भाई बहन और पत्नि तथा बच्चों आदि सभी का चीजों का जिक्र किया गया है। आइये जानते हैं भगवान कल्कि की पूजा विधि और उनसे जुड़ी बातें- 

भगवान कल्कि का परिवार

कलयुग में भगवान कल्कि के पिता विष्णु भक्त तथा तथा उन्हें वेद और पुराण का भी ज्ञान होगा। उनके पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति होगा। रामाअवतार की तरह कुल चार भाई होंगे। भगवान कल्कि, सुमंत, प्राज्ञ और कवि ये सभी मिलकर धर्म की स्थापना करेंगे। भगवान कल्कि के चार पुत्र और दो पत्नियां होंगी। उनके पुत्र के नाम जय, विजय, मेघमाल, बलाहक होंगे और पत्नियों के नाम लक्ष्मी रूपी पद्मा और वैष्णवी रूपी रमा होंगी।

भगवान कल्कि की पूजा विधि

जयंती के दिन प्रातःकाल स्‍नान आदि से निवृत्‍त होकर सर्वप्रथम व्रत का संकल्‍प करना चाहिए। इसके बाद भगवान कल्कि की प्रतिमूर्ति को गंगाजल से स्‍नान कराकर उन्‍हें वस्‍त्र पहनाएं। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान कल्कि को स्‍थापित करें। धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्‍प और अगरबत्‍ती से पूजा करें। पूजा के उपरांत  भगवान कल्कि से परिवार की सुख शांति की कामना करनी चाहिए।

डिसक्लेमर

 

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Edited By: Ritesh Siraj