करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद कितनी बार करनी चाहिए उसकी परिक्रमा, क्या मिलता है फल?
करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए? जानिए चांद की परिक्रमा का सही ...और पढ़ें

चंद्रमा की चार परिक्रमा करने से अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति मिलती है। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। करवाचौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को करवा माता, भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन करने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए और इसका क्या धार्मिक महत्व है?
इस विषय पर हमारी बात उज्जैन के ज्योतिषाचार्य एंव पंडित मनीष शर्मा से हुई है। वह कहते हैं, "परिक्रमा के बिना किसी भी देवी देवता की पूजा अधूरी है। परिक्रमा का अर्थ होता है कि आप पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ,अपना अहंकार त्याग करके उनकी अराधना कर रहे हैं। ऐसा करने से आपको उनकी ऊर्जा प्राप्त होती है। हर देवी देवता की परिक्रमा के अलग फल होते हैं और परिक्रमा की संख्या भी अलग होती है।" तो चलिए जानते हैं कि करवा चौथ पर चंद्रमा की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए और इसके क्या फल होते हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद कितनी बार करें परिक्रमा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवाचौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद उनकी 4 बार परिक्रमा करने की परंपरा बताई जाती है। हालांकि, आम दिनों में चंद्रमा की 3 बार परिक्रमा करनी चाहिए, मगर चतुर्थी के दिन चंद्रमा की चार बार परिक्रमा की जाती है।
करवाचौथ की रात चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं सबसे पहले चंद्र देव के दर्शन करती हैं। इसके बाद उन्हें जल, अक्षत और फूल अर्पित करके सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं। कई महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखने के बाद अपने पति का चेहरा देखती हैं। फिर पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलती हैं।
परिक्रमा करने से मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवाचौथ पर विधि-विधान से पूजा करने और चंद्र देव की आराधना करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अखंड सौभाग्य का अर्थ है पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन।
घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना
करवाचौथ की पूजा केवल पति की लंबी उम्र के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी की जाती है। मान्यता है कि चंद्र देव की पूजा और परिक्रमा करने से घर में सकारात्मकता, शांति और खुशहाली बनी रहती है।
इस अवसर पर महिलाएं अपने परिवार की उन्नति, संतान की खुशहाली और घर में प्रेमपूर्ण वातावरण बनाए रखने की कामना भी करती हैं। पूजा के दौरान मन में श्रद्धा और सकारात्मक विचार रखना विशेष महत्व रखता है।
दांपत्य जीवन के कष्ट दूर होने की मान्यता
करवाचौथ का व्रत और पूजा पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सामंजस्य बढ़ाने का प्रतीक है। चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने और आपसी संबंधों में मधुरता बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं।
कुल मिलाकर, करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद चार बार परिक्रमा करनी चाहिए।
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