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करवाचौथ पर नथ से चंद्रमा को क्‍यों दिया जाता है अर्घ्‍य? अखंड सौभाग्‍य से जुड़ी है यह मान्यता

Published: Tue, 27 Oct 2026 05:49 PM (IST)

करवाचौथ पर सुहागिन महिलाएं नथ से चंद्रमा को अर्घ्य क्यों देती हैं? यूपी के कानपुर, लखनऊ और प्रयागराज में निभाई ...और पढ़ें

करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की अनोखी परंपरा । (Picture Credit- AI Generated)

करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की अनोखी परंपरा । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को सोलह श्रृंगार करके चंद्रमा के दर्शन कर और और विधि-विधान से अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। इस दौरान कई जगहों पर नथ से जल गिराते हुए चंद्रमा को अर्घ्‍य देने की परंपरा है।

इनमें से उत्‍तरप्रदेश के कुछ इलाकों जैसे कानपुर, लखनऊ और प्रयागराज में यह इस अनोखी परंपरा को विधि से निभाया जाता है। आखिर चंद्रमा को अर्घ्‍य देने की इस अनोखी परंपरा के पीछे क्‍या रहस्‍य और इसका क्‍या धार्मिक मान्‍यता है? चलिए जानते हैं। मान्यताएं जुड़ी हैं।

नथ से जल गिराने की क्या है परंपरा?

करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देते समय कुछ क्षेत्रों में महिलाएं लोटे या करवे से जल की धार गिराते हुए उसे अपनी नथ के पास से निकालती हैं या नथ से स्पर्श कराती हैं। इसी के साथ करवे में लगी एक-एक सींक नथ पर लगाते हुए लोटे से जल गिराते जाएं। यह परंपरा विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ इलाकों में प्रचलित है। इस रस्म के दौरान महिलाएं अपने सुहाग और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए साथ-साथ कुछ लाइनें भी बोलती जाती हैं, जो क्षेत्र और स्थान के अनुसार बदलती जाती हैं।

जैसे-

1- अर्घ्‍य लूं चंद्रमा तेरा, सुहाग अमर रहे मेरा

2- चंदा का दियाना, चंदनिया की रात, चंद्रमा का अर्घ्‍य, मेरे पिया का व्रत

अखंड सुहाग का प्रतीक है नथ

हिंदू धर्म में नथ को सुहागिन महिलाओं के सोलह श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसे विवाह, सौभाग्य और सुहाग से जोड़कर देखा जाता है। करवा चौथ के दिन नथ पहनकर चंद्रमा को अर्घ्य देना पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना का प्रतीक माना जाता है।

लोकमान्यता के अनुसार, नथ के पास से जल गिराना अपने सुहाग के प्रतीक को पूजा में शामिल करने का एक तरीका है। इसके माध्यम से महिलाएं अपने पति के प्रति प्रेम, समर्पण और वैवाहिक रिश्ते की मजबूती की कामना करती हैं।

पवित्रता और सकारात्मकता से जुड़ी मान्यता

इस परंपरा के पीछे यह विश्वास भी है कि सुहाग के प्रतीक नथ का स्पर्श पाकर अर्घ्य की रस्म और भी शुभ हो जाती है। जल को हिंदू धर्म में पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। वहीं, चंद्रमा को अर्घ्य देना मन की शांति और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा होता है। ऐसे में नथ से जल गिराने की परंपरा को श्रद्धा, पवित्रता और पति-पत्नी के रिश्ते के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

क्या नथ से नजर दोष दूर होता है?

यह मान्‍यता है कि नथ से जुड़ी यह रस्म सुहाग को बुरी नजर से बचाने के लिए होती है। करवा चौथ पर महिलाएं सुंदर वस्त्र और श्रृंगार धारण करती हैं। ऐसे में उन्‍हें या उनके सुहाग को नजर लगने की संभावना होती है । ऐसे में नथ से जल गिराने से नजर दोष दूर होता है और अखंड सौभाग्‍य की प्राप्ति होती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।