चांद का दीदार होते ही टूट न पड़ें खाने पर, करवाचौथ व्रत के पारण में रखें खान-पान से जुड़ी इन जरूरी बातों का ध्यान
करवाचौथ व्रत के पारण के बाद महिलाओं को हल्के और सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए, ताकि एसिडिटी से बचा ...और पढ़ें

करवा चौथ व्रत के बाद क्या खाएं? (Picture Credits- AI Images)
HighLights
व्रत खोलने के बाद तला-भुना खाने से बचें।
गुनगुने पानी और हल्की मिठाई से करें पारण।
सात्विक और सुपाच्य आहार को दें प्राथमिकता।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। विवाहित महिलाओं को जिस व्रत का लंबे समय से इंतजार था, वो अब खत्म हो चुका है। उत्तर भारत के कई राज्यों में 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार यानी आज सुहागिन का पर्व यानी करवाचौथ मनाया जा रहा है। आज शादीशुदा औरतें पूरे दिन निर्जला यानी बिना आहार-पानी ग्रहण किए व्रत रखेंगी और शाम को चांद के दीदार और अर्घ्य देने के बाद इस व्रत का समापन होगा।
करवाचौथ की पूजा और चंद्र दर्शन संपन्न होते ही अक्सर अधिकतर महिलाएं भूख-प्यास के कारण भूल जाती हैं, कि सबसे पहले क्या करना चाहिए। आइए जानते हैं करवाचौथ का पारण पर खान-पान से कुछ जुड़ें नियमों के बारे में।
करवाचौथ का व्रत खोलने के बाद क्या करना चाहिए?
आज करवाचौथ पर चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देने के बाद जब खाना खाएं तो एकदम से ही काफी मात्रा में भोजन करने से बचना चाहिए। पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद विवाहित महिलाओं को पानी पीना चाहिए और फिर 20 से 25 मिनट बाद कुछ हल्का-सा भोजन करना सही रहता है। पानी न तो बिल्कुल गर्म होना चाहिए और न ही अधिक ठंडा। इतने समय तक भूखे रहने के बाद गुनगुना पानी पीना पेट के लिए अच्छा माना जाता है।
पानी पीने के बाद चंद्रमा देवता को अर्पित किया गया मीठा (बताशा, पेड़ा या किसी भी तरह का सात्विक मिठाई) खाने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
दिन भर भूखे रहने के बाद एकदम से ही तला-भूना या मसालेदार खाना खाने से पेट में एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इसलिए व्रत खोलने के बाद हमेशा संतुलित आहार ही ग्रहण करना चाहिए।
खाने की थाली में क्या होना चाहिए?
करवाचौथ की पूजा करने के बाद जब भोजन करने जाए, तो इस बात का ध्यान रखें कि खाने की थाली पूरी तरह से सात्विक और पवित्र होनी चाहिए।
इस दौरान खाने की थाली में प्याज, लहलुन और अधिक तेल और मसाला युक्त खाना खाने से बचना चाहिए। खाने की थाली में आप मूंग दाल की खिचड़ी, सादी रोटी, लौकी या तोरी की सब्जी या फिर दाल-चावल भी खा सकते हैं। यह आहार जल्दी से पचने वाले माने जाते हैं।
उत्तर भारत में इस दिन कई घरों में करवाचौथ के मौके पर पारण के बाद कढ़ी-चावल, उड़द की दाल वाली पूड़ियां या फिर मीठे पकवान बनाए जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी करवाचौथ व्रत का पारण पारंपरिक व्यंजन खाकर करते हैं, तो इन्हें सीमित मात्रा में रखें।
करवाचौथ के मौके पर सात्विक और पवित्र भोजन को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। किसी भी तरह की तामसिक (मांस और मांसाहारी उत्पाद, बासी, प्याज और लहसुन और मदिरा और नशीले पदार्थ) चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। कोशिश यही करें कि पूरे दिन के कठिन व्रत के बाद घर पर ही कुछ बनाकर खाएं, ताकि व्रत की पवित्रता और शुद्धता बनी रहे।
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