करवाचौथ पर क्यों सबसे खास माना जाता है सास का बायना? बहू के अखंड सौभाग्य से जुड़े रहस्य को समझें
करवाचौथ पर सास को बायना देने की परंपरा बहू के अखंड सौभाग्य और सास-बहू के रिश्ते को मजबूत करने का ...और पढ़ें

करवाचौथ पर सास का बायना क्यों है खास? (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
बायना सास-बहू के रिश्ते को मजबूत करता है।
अखंड सौभाग्य और आशीर्वाद के लिए बायना महत्वपूर्ण है।
इसमें सुहाग सामग्री, मिठाई, फल और दक्षिणा होती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। करवाचौथ का व्रत हिंदू धर्म में बहुत खास माना जाता है और इस दिन सुहागिन महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन जितना जरूरी व्रत करना माना जाता है उतना ही जरूरी कुछ अन्य रस्मों को निभाना भी होता है।
सुबह सबसे महत्वपूर्ण होता है सरगी का सेवन करना जिसे सास अपनी बहू को देती है। वहीं एक और परंपरा सास के लिए बायना निकालने की भी है। इस रस्म को भी व्रत जितना महत्वपूर्ण माना जाता है और हर बार करवाचौथ पर इसे श्रद्धा से निभाया जाता है।
इस रस्म को सास और बहू के बीच प्रेम, सम्मान और पारिवारिक रिश्तों की मिठास का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी सास को बायना देती हैं और उनका आशीर्वाद लेती हैं।
बायने में आमतौर पर सुहाग की सामग्री, मिठाई, फल और दक्षिणा जैसी चीजें होती हैं। यह रस्म मुख्य रूप से पूर्वांचल और उत्तरी भागों में निभाई जाती हैं। आइए आपको बताते हैं क्या है बायना की परंपरा और करवाचौथ पर क्यों है ये इतनी महत्त्वपूर्ण।
करवाचौथ पर सास को बायना क्यों दिया जाता है?
ऐसा माना जाता है कि सास को बायना देने से उनका आशीर्वाद मिलता है और अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। यह परंपरा एक तरह से घर के बड़ों के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है और इससे उन्हें यह पता चलता है कि उनकी परिवार के लिए कितनी अहमियत है। बायना आमतौर पर सुहागिन सास को दिया जाता है और यदि उनके पति न हों तो बायना के स्थान पर बहुएं पैर छूकर और उन्हें दक्षिणा देकर आशीर्वाद लेती हैं।
करवाचौथ के बायने में क्या-क्या चीजें होती हैं
करवाचौथ के बायने में सबसे प्रमुख मानी जाती है सुहाग की सामग्री जिसमें सोलह श्रृंगार से लेकर कपड़े तक को शामिल किया जाता है। इसमें करवाचौथ पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी शामिल होती हैं जैसे करवा, सींकें, कैलेंडर और चूरा, गट्टा आदि। बायना में मठरी, लड्डू, पेड़ा, घेवर या अन्य मिठाइयों को भी शामिल किया जाता है और यहां तक कि मौसमी फल भी रखे जाते हैं।
इसमें लाल, पीले या नारंगी रंग की साड़ी या चुनरी रखी जाती है और इसमें बिछिया रखना सबसे शुभ माना जाता है। बायना की सामग्री में नारियल रखना भी जरूरी होता है क्योंकि इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है।
करवाचौथ पर बायना कब निकाला जाता है?
सास के लिए बायना करवाचौथ की पूजा से पहले निकाला जाता है। इसे कई स्थानों पर एक दिन पहले ही दे दिया जाता है और इसमें रखी चीजों का इस्तेमाल सास अपनी करवाचौथ की पूजा में करती हैं। वहीं कई जगह बायना करवाचौथ की शाम को चंद्रमा की पूजा से पहले दिया जाता है। बायना देते समय बहू अपनी सास के पैर छूती है और उनसे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लेती है।
करवाचौथ पर बायना का महत्व
करवाचौथ के दिन बायना निकालना सिर्फ एक परंपरा नहीं है बल्कि ये सास-बहू के रिश्ते को मजबूत बनाने का एक तरीका भी होता है। बहू जहां अपनी सास से आशीर्वाद लेती है, वहीं सास बहू और पूरे परिवार की सलामती की प्रार्थना करती है। अगर किसी वजह से सास मौजूद नहीं हैं, तो बायना की रस्म ननद या जेठानी के साथ निभाई जाती है।
अगर आप भी करवाचौथ पर सास के लिए बायना निकालती हैं, तो यहां बताई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जिससे सास-बहू का रिश्ता अच्छा बना रहे।
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