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करवा चौथ पर क्यों होती है सिर्फ चंद्रमा की पूजा, सूर्यदेव की क्यों नहीं? पढ़ें पौराणिक कथा

Published: Tue, 27 Oct 2026 03:44 PM (IST)

करवा चौथ पर सुहागिनें पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व ...और पढ़ें

करवा चौथ के मौके पर चंद्र देव की पूजा का ही क्यों विधान है? (Picture Credits- AI Images)

करवा चौथ के मौके पर चंद्र देव की पूजा का ही क्यों विधान है? (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल कार्तिक पक्ष की चतुर्थी तिथि के मौके पर करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा रखा जाता है। इस साल यह पर्व 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन रखा जाएगा। इस खास मौके पर शादीशुदा औरतें पति की दीर्घायु और बेहतर भविष्य की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं।

करवा चौथ के दिन भगवान शिव, माता पार्वती, करवा माता और चंद्रमा की विशेषकर पूजा अर्चना की जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि करवा चौथ के दिन महिलाएं सिर्फ चंद्र देवता की ही क्यों पूजा करती हैं, सूर्यदेव की क्यों नहीं? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा के बारे में।

चंद्र देवता से जुड़ी पौराणिक कथा

वैदिक ज्योतिष परंपरा की मानें तो चंद्रमा को मन, ठंडक, माता और मानसिक शांति का कारक है। यही कारण है कि करवा चौथे वाले दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और शादीशुदा जीवन में प्यार बनाए रखने के लिए शीतलता के प्रतीक चंद्रमा देवता की पूजा करती हैं और उन्हें अर्घ्य देती हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्र देव अपनी सभी पत्नियों में से सबसे ज्यादा प्यार रोहिणी से करते थे। करवा चौथ के मौके पर रोहिणी नक्षत्र का खास संयोग बनता है, जिस कारण से चंद्रमा का अधिक महत्व बढ़ जाता है। चंद्र देव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और प्यार बना रहता है।

करवा चौथ पर सूर्य की पूजा क्यों नहीं होती है?

इसके विपरीत हिंदू परंपराओं में जहां सूर्य देव को काफी तेजवान और उग्र देवता माना जाता है, जबकि चंद्रमा ठंडक और शांति का प्रतीक है। इसी वजह से चंद्र देव की शीतल किरणें शादीशुदा जीवन में कलह को दूर करने में सहायक है। महाभारत में श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था।

करवा का असल मतलब मिट्टी का छोटा पात्र और चौथ का मतलब चतुर्थी दिन है। यानी इस दिन करवे में पानी भरकर शीतलता के प्रतीक चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसी कारण से इस पर्व को करवा चौथ भी कहा जाता है।

करवा चौथ 2026 मुहूर्त

इस साल करवा चौथ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम को 5 बजकर 38 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहने वाला है। इस दौरान सुहागिन महिलाएं भगवान शिव-माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

माना जाता है कि पूजा के समय करवा चौथ के समय कथा सुनने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा निभाई जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।