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कार्तिक मास में दीपदान से पहले क्यों जरूरी है दीपक की पूजा? जानिए सही नियम और धार्मिक महत्व

Published: Wed, 28 Oct 2026 10:01 AM (IST)

कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है, जिसमें दीपक प्रज्वलित करने से पहले उसकी पूजा विधि जानना आवश्यक है।

कार्तिक मास में दीपदान ! (Picture Credit- AI Generated)

कार्तिक मास में दीपदान ! (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कार्तिक मास में दीपदान का विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता आती है और जीवन से अंधकार दूर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपदान करने से पहले दीपक की पूजा किस तरह करनी चाहिए?

दीपक तैयार करने से लेकर उसे जलाने तक और सही स्थान पर रखने तक कुछ नियम बताए गए हैं। इस विषय पर हमारी पंडित मनीष शर्मा से बात हुई है और वो हमें दीपदान की सरल विधि समझा रहे हैं।

दीपदान से पहले दीपक की तैयारी

दीपदान के लिए मिट्टी का दीपक सबसे अधिक प्रचलित है। कुछ लोग आटे से बने दीपक का भी उपयोग करते हैं। दीपक में घी या तिल का तेल भरें। सरसों का तेल भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद उसमें रूई की बत्ती रखें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री साफ होनी चाहिए। दीपक को सीधे जमीन पर रखने के बजाय उसके नीचे थोड़े चावल, गेहूं के दाने या फूल रखकर उसका आसन बनाएं। 

पंडित मनीष शर्मा कहते हैं, " दीपदान में स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष महत्व है। पूजा की शुरुआत दीपक को साफ करके और मन को शांत रखकर करनी चाहिए।" 

इस विधि से करें दीपक का पूजन

दीपक जलाने से पहले पूजा स्थल को साफ करें। दीपक को आसन पर रखें और उसमें तेल या घी डालकर बत्ती डालें। इसके बाद दीपक पर रोली या चंदन का तिलक लगाएं। अक्षत और फूल अर्पित करें। चाहें तो दीपक के पास गुड़, बताशे या मिठाई का भोग भी रखा जा सकता है। इसके बाद हाथ जोड़कर दीपक को प्रणाम करें और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति की कामना करें।

दीपक जलाते समय बोलें यह मंत्र

दीपक प्रज्वलित करते समय श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का उच्चारण करें- 

दीपज्योतिः परंब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः।

दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥

इस मंत्र का भाव है कि दीपक की ज्योति परमात्मा का प्रतीक है। भक्त प्रार्थना करता है कि दीपक का प्रकाश उसके जीवन से नकारात्मकता और अज्ञान का अंधकार दूर करे।

दीपदान का सही समय और दिशा

कार्तिक मास में सांझी बेला, विशेषकर सूर्यास्त के आसपास, दीपदान करने का सबसे अच्‍छा समय होता है। कार्तिक का महीना शुरू होते ही घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और तुलसी के पास दीपक जलाए जाते हैं। कुछ लोग पीपल, शमी और अन्य पवित्र वृक्षों के पास भी दीपदान करते हैं, जो धार्मिक दृष्टि से बिल्‍कुल ठीक है। 

यम दीपदान के दक्षिण दिशा का विशेष महत्व महत्‍व बताया गया है। इससे घर के सदस्‍यों पर असमय मृत्‍यु का भय समाप्‍त हो जाता है। 

दीपदान करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • दीपक जलाने से पहले पूजा स्थल और दीपक को साफ करें।
  • दीपदान श्रद्धा और शांत मन से करें।
  • जलते दीपक को पर्दों, कपड़ों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
  • बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दीपक दूर रखें।
  • यम दीपदान के समय पीछे मुड़कर न देखें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।