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कन्या संक्रांति 2026: कब है सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश? शुभ मुहूर्त से महापुण्य काल और उपाय सब नोट करें

Published: Wed, 16 Sep 2026 11:53 AM (IST)Updated: Wed, 16 Sep 2026 11:55 AM (IST)

कन्या संक्रांति 2026 के दिन सूर्य देव की पूजा, स्नान-दान और पितृ तर्पण का खास महत्व है। जानिए सही समय, महापुण्य काल और सूर्य दोष दूर करने के उपाय।

कन्या संक्रांति पर पितृ तर्पण का खास महत्व (AI-Generated Image)

कन्या संक्रांति पर पितृ तर्पण का खास महत्व (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे 'कन्या संक्रांति' कहा जाता है। धार्मिक नजरिए से यह दिन बेहद पवित्र माना गया है। इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ से विशेष पुण्य मिलता है।

साथ ही, मान्यता है कि जीवन के कई कष्ट भी दूर होते हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में कन्या संक्रांति की तारीख, मुहूर्त और इससे जुड़े खास उपायों के बारे में।

कन्या संक्रांति 2026: शुभ मुहूर्त

पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में कन्या संक्रांति 17 सितंबर को है। इस दिन सुबह 07 बजकर 58 मिनट पर सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का अद्भुत संयोग भी बन रहा है, जिससे इन योगों में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा, हर साल की तरह इस दिन विश्वकर्मा पूजा भी मनाई जाएगी।

महापुण्य काल और पुण्य काल का समय

महापुण्य काल: सुबह 07:58 बजे से सुबह 10:01 बजे तक (कुल अवधि 2 घंटे 3 मिनट)।

पुण्य काल: सुबह 07:58 बजे से दोपहर 02:31 बजे तक (कुल अवधि 6 घंटे 33 मिनट)।

अगर आप महापुण्य काल में किसी व्यस्तता के कारण स्नान-दान न कर पाएं, तो निश्चिंत होकर पूरे पुण्य काल के दौरान कभी भी ये शुभ कार्य कर सकते हैं।

सूर्य देव को प्रसन्न करने और दोष दूर करने के उपाय

सूर्य अर्घ्य दें: महापुण्य काल में स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरें। उसमें थोड़ा सा गुड़, लाल चंदन और लाल फूल मिलाकर "ॐ सूर्यय नमः" मंत्र का जप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।

दान-पुण्य करें: अपनी क्षमता के अनुसार गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल कपड़े या लाल फूलों का दान किसी जरूरतमंद को करें। इससे कुंडली के सूर्य दोष शांत होते हैं।

पितृ तर्पण: जिनके माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं, वो लोग इस दिन पितरों का जल से तर्पण जरूर करें। इससे उनके पूर्वज तृप्त होते हैं और घर में सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं।

मंत्र जप: सूर्य देव के बीज मंत्र "ॐ घृणि: सूर्याय नम:" का जप करें या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। अगर कुछ और न कर सकें, तो बस अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा करके उनका आशीर्वाद ले लें, इसी से जीवन की हर बाधा दूर हो जाएगी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।