Kans Vadh: भगवान श्रीकृष्ण के मामा कंस का जिक्र आज क्यों किया जा रहा है, इसके पीछे एक वजह है। दरअसल हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने कंस मामा का वध करके शूरसेन जनपद वासियों को जिस दिन उसके अत्याचार से मुक्त कराया था, व​​ह तिथि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि​ थी, जो 07 नवंबर दिन गुरुवार को पड़ रही है। कंस वध की कथा हम सबने सुनी है और टीवी पर आने वाले धारावाहिकों के माध्यम से देखी है। आज हम कंस, उसके वध की कथा और उससे जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में जानते हैं:

1. कंस के पिता का नाम उग्रसेन था, वे शूरसेन जनपद के राजा थे। उग्रसेन यदुवंशीय राजा आहुक के पुत्र थे। उनकी माता का नाम काश्या थीं, जो काशीराज की पुत्री थीं। उग्रसेन दो भाई थे, उनके भाई का नाम देवक था।

2. कंस नौ भाई और पांच बहन था। कंस इन सब में बड़ा था। उसकी बहनों का ब्याह वसुदेव के छोटे भाइयों से हुआ था। कंस के भाइयों को नाम न्यग्रोध, सुनामा, कंक, शंकु, अजभू, राष्ट्रपाल, युद्धमुष्टि और सुमुष्टिद था। बहनें कंसा, कंसवती, सतन्तू, राष्ट्रपाली और कंका थीं।

3. कंस ने अपने पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया था और स्वयं शूरसेन जनपद का राजा बन बैठा। मथुरा शूरसेन जनपद में ही था।

4. कंस ने मगध के शासक जरासंध की दो बेटियों से अपना विवाह किया था। इस कारण वह और शक्तिशाली हो गया था।

5. कंस के काका का नाम शूरसेन था, वे मथुरा पर शासन करते थे। उनके पुत्र वसुदेव का विवाह कंस की चचेरी बहन देवकी से हुआ था। देवकी से ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

6. कंस देवकी से काफी स्नेह करता था। एक दिन वह देवकी के साथ कहीं जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि तू जिस देवकी से इतना स्नेह करता है, उसका 8वां पुत्र ही तेरी मौत का कारण बनेगा।

7. मौत के भय से कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया। उसने एक-एक करके देवकी के 6 बेटों को मार डाला। फिर शेषनाग ने मां देवकी के गर्भ में प्रवेश किया तो भगवान विष्णु ने माया से वसुदेव की पत्नी रोहिणी के पेट में उस गर्भ को रख दिया।

8. इसके बाद भगवान विष्णु स्वयं माता देवकी के गर्भ से कृष्णावतार में पृथ्वी पर आए। वे वसुदेव की आठवीं संतान थे। भगवान विष्णु के आदेशानुसार, वसुदेव बाल कृष्ण को नंदबाबा के घर पहुंचा आए।

9. जब कंस को कृष्ण के गोकुल में होने की सूचना मिली, तो उसने कई बार उनकी हत्या की कोशिश की, लेकिन हर बार विफल रहा। तब एक दिन उसने साजिश के तहत कृष्ण और बलराम को अपने दरबार में आमंत्रित किया। जहां श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता देवकी और वसुदेव को कारागार से मुक्त कराया।

10. कंस वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने उग्रसेन को दोबारा राजा की गद्दी पर बैठा दिया।

Posted By: Kartikey Tiwari

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