Kali Chaudas 2026: मां काली की श्यामा पूजा में क्यों होता है महानिशाकाल में विशेष अनुष्ठान?
काली चौदस 2026 पर 8 नवंबर को मां काली की श्यामा पूजा में महानिशाकाल का क्या महत्व है, जानें शुभ ...और पढ़ें

महानिशाकाल में श्यामा पूजा का महत्व और नियम ।
HighLights
मां काली की श्यामा पूजा का विशेष महत्व है।
महानिशाकाल में मंत्रोच्चार और दीपदान से होती है पूजा।
प्रतीकात्मक बलि द्वारा नकारात्मकता का त्याग किया जाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मां काली की पूजा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मां काली को शक्ति, साहस और बुराई का नाश करने वाली देवी माना जाता है। हर साल कार्तिक अमावस्या के अवसर पर काली बाड़ी में मां काली की विशेष पूजा की जाती है।
इस बार काली चौदस 8 नवंबर को है। दिल्ली के वसुंधरा इंक्लेव की काली बाड़ी के मुख्य पुरोहित शुभदीप जी बताते हैं, "इस पूजा में महानिशाकाल के दौरान मां काली के चरणों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।" आइए जानते हैं इस पूजा को क्या कहते हैं, कौन इसमें शामिल हो सकता है और इसके क्या विशेष नियम हैं।
इस पूजा को क्या कहा जाता है?
मां काली की इस विशेष पूजा को 'श्यामा पूजा' या 'काली पूजा' कहा जाता है। बंगाल, असम और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में इसका विशेष महत्व है। इस दौरान मां काली की प्रतिमा स्थापित करके रात में विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां काली की आराधना करने से भय, नकारात्मकता और बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है। भक्त उनसे परिवार की सुख-शांति और रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
महानिशाकाल में होती है विशेष पूजा
काली पूजा में महानिशाकाल का विशेष महत्व माना जाता है। इस समय मां काली के चरणों में मंत्रोच्चार, दीपदान और विशेष पूजा की जाती है। पुरोकहत जी बताते हैं, "निशाकाल हमेशा 8 बजे से शुरू हो जाता है और महानिशाकाल रात 12 बजे से शुरू होकर 3 बजे तक रहता है।"
पूजा में कौन-कौन शामिल हो सकता है?
दिल्ली के वसुंधरा इंक्लेव की कालीबाड़ी मंदिर के प्रबंधन से जुड़े पंकज चटर्जी और मुख्य पुरोहित शुभदीप संधकी के अनुसार, मां काली की पूजा में श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं। हालांकि, विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों और मंत्रों के लिए अलग नियम होते हैं। सामान्य भक्त मंदिर में जाकर मां के दर्शन कर सकते हैं, दीप जला सकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
पूजा के विशेष नियम क्या हैं?
मां काली को देवी दुर्गा का उग्र स्वरूप माना जाता है। इसलिए उनकी विशेष पूजा में कुछ नियमों का पालन करना जरूरी बताया जाता है।
- पूजा हमेशा स्वच्छता और श्रद्धा के साथ करें।
- विशेष मंत्रों का जाप योग्य गुरु या पुरोहित के मार्गदर्शन में करें।
- तांत्रिक पूजा बिना उचित दीक्षा और प्रशिक्षण के नहीं करनी चाहिए।
- मंदिर में होने वाले अनुष्ठानों के नियमों का पालन करें।
- पूजा के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखें।
मां काली को चढ़ाई जाती है प्रतीकात्मक बलि
काली पूजा में बलि की परंपरा भी कुछ स्थानों पर प्रचलित है। हालांकि, कई मंदिरों में पशुबलि के स्थान पर प्रतीकात्मक बलि दी जाती है। कालीबाड़ी प्रबंधन समिति के सदस्य पंकज चटर्जी के अनुसार, इस पूजा में खीरा, कद्दू, गन्ना और केला चढ़ाकर प्रतीकात्मक बलि दी जाती है। इसका उद्देश्य देवी के प्रति समर्पण और नकारात्मकता के त्याग का भाव प्रकट करना है।
बिना मंत्र दीक्षा के क्यों नहीं करनी चाहिए विशेष पूजा?
मुख्य पुरोहित के अनुसार, मां काली की विशेष तांत्रिक साधना बिना मंत्र दीक्षा के नहीं करनी चाहिए। मां काली का स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और उग्र माना जाता है। इसलिए ऐसी साधना योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
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