Kali Chaudas 2026: नरकासुर का वध और काली चौदस की रात... दीवाली से ठीक पहले क्यों होती है मां काली की पूजा?
काली चौदस का पर्व दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है, जिसमें मां काली की पूजा का विशेष महत्व ...और पढ़ें

काली चौदस का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
काली चौदस दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है।
मां काली की पूजा से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
यह पर्व नरकासुर वध और बुराई पर विजय का प्रतीक है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में काली चौदस (Kali Chaudas 2026) के पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व दीवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस अवसर पर मां काली की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां काली की साधना करने से साधक के जीवन के सभी भय दूर हो जाते हैं और मां काली की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि काली चौदस पर मां काली की साधना का विधान क्यों है? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताते हैं इसके पीछे की खास वजह के बारे में।
हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को काली चौदस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां काली की पूजा करने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
नकारात्मक शक्तियों का नाश- काली चौदस का अर्थ है अंधकार या बुराई का नाश करने वाली शक्ति। धार्मिक मान्यता के अनुसार, काली चौदस की रात को नकारात्मक शक्तियों और बुरी आत्माओं का प्रभाव काफी बढ़ जाता है। इसलिए इस रात को मां काली की पूजा-अर्चना कर नकारात्मकता से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
भय से छुटकारा- मां काली अंधकार, भय और बुराई की नाशक हैं। इसलिए आधी रात को उनकी उपासना करने से बुरी नजर, टोने-टोटके और घर की हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
नरकासुर का वध और बुराई पर विजय- कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। इसलिए इस दिन बुराई और अधर्म को समाप्त करने वाली देवी, मां काली की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
कब है काली चौदस 2026
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत- 07 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का समापन- 08 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर
पंचांग के अनुसार, इस बार काली चौदस का पर्व 07 नवंबर को मनाया जाएगा।
काली चौदस मुहूर्त- रात को 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक
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