काली चौदस पर गुजरात में निभाई जाती हैं ये 4 परंपराएं, जानिए अभ्यंग स्नान से मां काली की पूजा का महत्व
काली चौदस, जिसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस भी कहते हैं, दिवाली के दौरान मनाई जाती है और इसका हिंदू ...और पढ़ें

दीवाली से एक दिन पहले मनाई है काली चौदस (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
गुजरात में काली चौदस पर अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व।
मां काली और भगवान हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना।
नकारात्मक शक्तियों से बचाव हेतु काजल लगाने की अनोखी परंपरा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में काली चौदस के पर्व का अत्यधिक महत्व है, जिसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन छोटी दिवाली भी मनाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार, काली चौदस का दिन मां काली की उग्र और रक्षात्मक शक्ति को समर्पित है।
इस पावन रात्रि में मां काली की साधना, पूजा और दीपदान करने से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और नजर दोष से मुक्ति मिलती है। देशभर में दिवाली के दौरान काली चौदस का पर्व अलग-अलग रीति-रिवाजों से मनाया जाता है। वहीं, गुजरात में इसे बेहद अनोखे और पारंपरिक अंदाज में मनाने का विधान है। आइए विस्तार से जानते हैं कि गुजरात में काली चौदस का पर्व किस तरह मनाया जाता है।
कब है काली चौदस
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत- 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का समापन- 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, 7 नवंबर को मनाई जाएगी।
काली चौदस मुहूर्त- 8 नवंबर को रात 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक
काली चौदस पर गुजरात की प्रमुख परंपराएं
अभ्यंग स्नान
गुजराती परंपरा में काली चौदस के दिन सुबह स्नान का विशेष महत्व है। सूर्योदय से पहले लोग शरीर पर तेल और उबटन लगाते हैं, जिसे 'अभ्यंग स्नान' कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति का शरीर शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मां काली की पूजा
काली चौदस के अवसर पर तंत्र-मंत्र के साधक मां काली और भगवान काल भैरव की विशेष उपासना करते हैं। मान्यता है कि इस रात्रि में साधना करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक सिद्धियों के साथ-साथ मां काली का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हनुमान जी की पूजा
इसके अलावा, गुजरात में काली चौदस की शाम को हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने का भी विधान है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, बजरंगबली की आराधना करने से जीवन में आने वाले सभी संकट और भय दूर हो जाते हैं।
काजल लगाने की परंपरा
इस दिन हनुमान जी की पूजा के दौरान प्रज्वलित दीपक की लौ से काजल तैयार किया जाता है, जिसे रात में सोते समय आंखों में लगाया जाता है। मान्यता है कि यह काजल व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से सुरक्षित रखता है।
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