विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जितिया 2026: पहली बार करने जा रही हैं जीवित्पुत्रिका व्रत? नहाय-खाय से लेकर दही-चूड़ा तक, नोट करें हर जरूरी बात

Published: Thu, 01 Oct 2026 09:52 AM (IST)

जितिया व्रत (Jitiya Vrat 2026 जो 3 अक्टूबर को है, संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं द्वारा रखा जाता ...और पढ़ें

पहली बार व्रत करने वालों के लिए जितिया व्रत के नियम

पहली बार व्रत करने वालों के लिए जितिया व्रत के नियम

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। बिहार, उत्तर-प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल की हिंदू महिलाओं के लिए जितिया 2026 का व्रत बेहद खास महत्व रखता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, बेहतर स्वास्थ्य और सुखद जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

जितिया (Jitiya Vrat 2026) को 'जिउतिया' और 'जीवित्पुत्रिका' व्रत के नाम से जाना जाता है। जितिया का व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। अगर जो भी महिलाएं अपने संतान की मंगल कामना के उद्देश्य से पहली बार जितिया का व्रत रखने जा रही हैं, उन्हें कुछ खास नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।

3 अक्टूबर को जितिया व्रत

इस साल जितिया का व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के हिसाब से आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 3 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट होगा।

वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि के हिसाब 3 अक्टूबर, शनिवार को जितिया का व्रत रखा जाएगा।

पहली बार रखने वाली महिलाओं के लिए जितिया के नियम

जितिया का व्रत मुख्य रूप से तीन दिनों का होता है। जिसमें पहला दिन नहाय खाय, दूसरा दिन निर्जला उपवास और तीसरे दिन पारण किया जाता है। आइए जानते हैं इन तीन दिनों में किन नियमों का पालन करना चाहिए?

नहाए-खाए
जितिया का व्रत (Jitiya Vrat 2026) नहाय-खाय 2 अक्टूबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को सात्विक भोजन और जीवनशैली का पालन करना चाहिए। इस दिन भोजन के रूप में नोनी का साग, मडुआ की रोटी और कद्दू या लौकी की सब्जी जरूर खानी चाहिए।

निर्जला व्रत
नहाय खाए के दूसरे दिन निर्जला व्रत का उपवास रखा जाएगा। इस दौरान व्रत करने वाली महिलाओं को अन्न और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। इस दिन माताएं सूर्यादय से पहले उठकर 3 बजे मीठा भोजन या दही-चूड़ा खा सकती हैं। सूर्योदय होने के साथ ही निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा।

पारण
इस व्रत का पारण तीसरे दिन पूजा-पाठ और सूर्योदय को जल देने के बाद ही किया जाता है। अलग-अलग स्थानों पर पारण के मौके पर पारंपरिक भोजन खाने की परंपरा है।

जितिया व्रत 2026 से जुड़े नियम

जितिया व्रत तीन दिनों तक चलने वाले इस पवित्र त्योहार पर व्रती महिलाएं साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखती हैं।

जितिया का व्रत निर्जल रहकर ही रखा जाता है और इस दिन किसी भी तरह का अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है।

इस व्रत का पालन करने वाली महिलाएं भूलकर भी तीन दिनों तक गुस्सा न करें। न ही अपनी संतान के लिए किसी भी तरह के अपशब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए।

पहली बार रखने वाली महिलाएं जितिया व्रत की शुरुआत से लेकर पारण तक सात्विकता और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

इसके अलावा जितिया व्रत के मौके पर चील-सियारिन और भगवान जीऊतवाहन की कथा जरूर सुनें। बिना कथा सुनें इस व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता है।

यह भी पढ़ें- जितिया व्रत 2026: संतान की दीर्घायु का रक्षा-कवच है 'जिउतिया लॉकेट', क्या है इसे धारण करने का सही नियम?

यह भी पढ़ें- जितिया पर बच्चों को जरूर दें ये 5 चीजें, टल जाएगी हर अनहोनी और मिलेगा जीमूतवाहन का आशीर्वाद!

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।