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3 दिन का कठिन व्रत और अनोखा खान-पान: जानिए क्यों इतना खास है यूपी, बिहार और नेपाल का 'जितिया' पर्व

Published: Tue, 29 Sep 2026 11:00 AM (IST)

जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका भी कहते हैं, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल में माताओं द्वारा बच्चों की सलामती के लिए रखा जाने वाला तीन दिवसीय त्योहार है।

जितिया परंपराएं बिहार उत्तर प्रदेश और नेपाल

जितिया परंपराएं बिहार उत्तर प्रदेश और नेपाल

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जितिया जिसे 'जिउतिया' या 'जीवितपुत्रिका' के नाम से भी जाना जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पड़ोसी देश नेपाल में भी मनाया जाता है।

द्रिक पंचांग के हिसाब से हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सातवीं से नौवीं चंद्र तिथि मनाया जाने वाला यह तीन दिवसीय प्राचीन हिंदू त्योहार है। माताएं इस दिन अपने बच्चों की सलामती के लिए उपवास रखती हैं।

जितिया तीन दिवसीय त्योहार

बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में जितिया तीन दिनों का त्योहार है। जिसमें पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन माताएं नहाने के बाद ही अन्न ग्रहण करती हैं। जितिया का दूसरा दिन जिसे 'खुर-जितिया' कहा जाता है, माताएं इस दिन अपने संतान की सलामती के लिए कठिन व्रत का पालन करती हैं। इसमें पानी पीना भी वर्जित माना जाता है।

जितिया का तीसरा दिन पारण, इस दिन माताएं व्रत तोड़ती हैं। इस दिन कई तरह के पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं। जिसमें करी-चावल, नोनी साग और मरुआ की रोटी प्रमुख है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल में भी जितिया पर इसी परंपरा का पालन किया जाता है, लेकिन क्षेत्रीय विभिन्नता के कारण खान-पान और संस्कृति में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।

बिहार और उत्तर प्रदेश में जितिया के मौके पर 'सियार-बाज की कहानी' सुनी-सुनाई जाती है। इसके अलावा व्रती महिलाएं जिउतवाहन देवता की पूजा भी करती हैं।

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नेपाल में जितिया का पर्व

जितिया पर्व भोजपुर, मिथिलांचल की शादीशुदा महिलाओं और पूर्वी और मध्य नेपाल की थारू और मधेसी महिलाओं के लिए भी अत्यंत खास त्योहार है। नेपाली महिलाएं भी इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और अगले दिन अष्टमी के मौके पर व्रत का पारण करती हैं।

नेपाल में रहने वाली थारू महिलाएं परंपरा के मुताबिक, व्रत से एक दिन पहले मछली और बाजरे से बनी रोटी खाती हैं। व्रत से पहले की रात वे अष्टमी शुरू होने से पहले भोजन करती हैं। इसके अलावा थारू महिलाएं इस दिन झमटा नाम एक पारंपरिक नृत्य भी करती हैं। इसके अलावा नेपाल तराई क्षेत्र में रहने वाली थारू महिलाओं के लिए जितिया के मौके पर सार्वजनिक छुट्टी भी होती है।

उत्तर प्रदेश और नेपाल की क्षेत्रिया परंपराएं

बिहार- जितिया के मौके पर महिलाएं सामूहिक पूजा में शामिल होकर भजन, कथा और लाल-पीला रंग का जिउतिया धागा पहनती हैं। बिहार के मिथिला, मगध और भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में परंपराएं थोड़ी अलग देखने को मिल सकती हैं।

नेपाल के तिराई क्षेत्र में रहने वाली थारू और मधेसी महिलाएं जितिया के मौके पर प्रकृति की पूजा करती हैं। इसके अलावा व्रत से एक दिन पहले मछली और रोटी खाने की भी परंपरा निभाई जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।