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जीवित्पुत्रिका व्रत में संतान का सुरक्षा कवच माना जाता है 'जितिया धागा', इसे धारण करना क्यों है जरूरी?

Published: Mon, 28 Sep 2026 07:50 PM (IST)

जीवित्पुत्रिका व्रत में संतान की दीर्घायु और सुरक्षा के लिए जितिया धागा धारण किया जाता है। माताएं भगवान जीमूतवाहन की ...और पढ़ें

जीवित्पुत्रिका व्रत में जितिया धागा क्यों है संतान का सुरक्षा कवच (Picture Credit: AI Generated)

जीवित्पुत्रिका व्रत में जितिया धागा क्यों है संतान का सुरक्षा कवच (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. जितिया धागा संतान की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए धारण किया जाता है।

  2. माताएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा के बाद इसे हाथ में बांधती हैं।

  3. यह धागा बच्चों के लिए एक सुरक्षा कवच और समृद्धि का प्रतीक है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के कई व्रत त्योहारों की तरह एक व्रत है जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत हर साल आश्विन महीने में पड़ता है और इसे संतान की दीर्घायु की कामना में रखा जाता है।

इस व्रत को तीन दिन तक माताएं करती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। इस व्रत से जुड़ी कई परंपराओं में से एक है जितिया धागा धारण करना। इस व्रत को पूर्ण तब माना जाता है जब व्रती माताएं पूजा करने के बाद इस धागे को अपने हाथ में धारण करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस धागे को संतान की रक्षा के लिए एक कवच माना जाता है और इसे संतान के भाग्य के लिए भी अच्छा माना जाता है। इस धागे को हाथ में बांधने के कुछ नियम भी हैं और इसका महत्व भी बहुत ज्यादा है। आइए आपको बताते हैं जीवित्पुत्रिका व्रत में जितिया धागा बांधने के कारणों के बारे में।

संतान की सुरक्षा के लिए जितिया धागा

माताएं पूजा के समय भगवान जीमूतवाहन के सामने लाल रंग का एक धागा जिसे जितिया धागा कहा जाता है, अर्पित करती हैं और पूजा समाप्त होने के बाद इसे हाथ में धारण करती हैं। इस धागे को संतान के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है। इस धागे को बांधने से साथ माताएं ईश्वर से अपने बच्चों की सलामती की प्रार्थना करती हैं और इस संकल्प के साथ धागा धारण करती हैं कि इसे कुछ निश्चित समय तक बांधेंगी।

इस धागे को माता का बच्चों के प्रति प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। स्कन्द पुराण में भगवान जीमूतवाहन और नागवंश की कथा का वर्णन मिलता है और यह भी लिखा है कि कैसे उन्होंने नागवंश को बचाया था। इसी वजह से आज भी इस व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा होती है और यह विशेष धागा धारण किया जाता है।

जितिया धागा कहां बांधा जाता है?

जीवित्पुत्रिका व्रत रखने वाली माताएं इस लाल-पीले रंग के धागे को हाथ की कलाई या फिर गले में धारण करती हैं। इसमें एक लॉकेट पिरोया जाता है और इसे धारण किया जाता है। इसमें हर साल अपनी संतानों की संख्या से एक ज्यादा गांठ लगाकर धारण किया जाता है। यह धागा लाल या पीले रंग का होता है क्योंकि ये घर की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

जितिया धागा कितने दिनों तक बांधना जरूरी है?

इस धागे को पूजा के बाद कम से कम एक दिन यानी कि 24 घंटे जरूर बांधना चाहिए। आप इसे एक दिन से ज्यादा भी बांध सकती हैं। कई माताएं इस धागे को एक साल तक भी बांधकर रखती हैं।

यदि आप इस धागे को उतार रही हैं, तो इसके लिए भी कुछ नियम हैं। जैसे आपको रविवार या मंगलवार के दिन इस धागे को नहीं उतारना चाहिए और आप जब भी इसे उतारें इसे कूड़े में न डालें। आप इस धागे को श्रद्धा पूर्वक किसी नदी में प्रवाहित करें या पेड़ के नीचे रखें।

अगर आप भी जितिया व्रत करती हैं, तो इसकी पूर्णता के लिए गले या कलाई में जितिया का धागा जरूरी पहनें। यह संतान की मंगलकामना का प्रतीक होता है और घर की सुरक्षा के लिए भी जरूरी माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।