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जितिया व्रत 2026: संतान की दीर्घायु का रक्षा-कवच है 'जिउतिया लॉकेट', क्या है इसे धारण करने का सही नियम?

Published: Wed, 30 Sep 2026 10:32 AM (IST)

जितिया व्रत में संतान की लंबी आयु और खुशहाली के लिए जिउतिया लॉकेट का विशेष महत्व है। यह लाल या ...और पढ़ें

जितिया व्रत पर जिउतिया लॉकेट पहनने की परंपरा (Picture Credits- AI Images)

जितिया व्रत पर जिउतिया लॉकेट पहनने की परंपरा (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में जितिया व्रत का खास महत्व है। यह व्रत महिलाएं संतान की सलामती और खुशहाल जीवन की कामना के लिए करती हैं। हर वर्ष आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जितिया (जीवित्पुत्रिका) का व्रत रखा जाता है।

इस साल यह जितिया का व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल के कुछ इलाकों में यह व्रत खासतौर पर माताओं द्वारा अपनी संतान की दीर्घायु, सुख औ समृद्धि के उद्देश्य से किया जाता है।

जितिया के व्रत में जितना पूजा और उपवास का महत्व है, उतना ही महत्व लाल और पीले रंग के धागे में बांधा जिउतिया लॉकेट का भी है।

जिउतिया लॉकेट का धार्मिक महत्व

जितिया का व्रत रखने वाली माताएं इस दिन लाल या पीले रंग का धागा धारण करती हैं, जिसमें सोने या चांदी का लॉकेट होता है।

यह धागा और लॉकेट सिर्फ आभूषण ही नहीं, बल्कि मां की ममता, आस्था और संकल्प का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि, इस पवित्र धागे और लॉकेट के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।

jitiya locket wearing rules tradition and religious importance in jitiya vrat 2026 (1)

जिउतिया लॉकेट की पहचान

जिउतिया लॉकेट के ऊपर प्राचीन धार्मिक 'जीमूतवाहन' की आकृति उकेरी जाती है। इसे लाल या पीले रंग के धागे के साथ गले में पहना जाता है।

जिउतिया लॉकेट को लेकर लोगों का मानना है कि, इससे पहनने से संतान की उम्र लंबी होने के साथ सेहत, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। हर वर्ष जिउतिया के मौके पर सोने और चांदी के इन लॉकेटों की दुकानों में भारी मांग देखने को मिलती है।

जिउतिया लॉकेट पहने की परंपरा

जिन माताओं की दो या तीन संतान होती है, वे सभी लॉकेट एक ही धागे में पिरोकर पहनती हैं। पूजा खत्म होने के बाद यह धागा सबसे पहले बच्चों को पहनाया जाता है और फिर माताएं खुध इसे पहन लेती हैं। यह परंपरा मां और बच्चे के बीच आध्यात्मिक संबंध को ओर भी मजबूत करने का काम करता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।