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    Janeu Sanskar: जनेऊ पहनने से मिलते हैं कई लाभ, बस ध्यान रखने होंगे ये नियम

    Updated: Tue, 23 Apr 2024 05:08 PM (IST)

    हिंदू धर्म में जनेऊ धारण करने का विशेष महत्व है।सनातन मान्यताओं के अनुसार तीन धागे वाले जनेऊ को बहुत ही महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। जनेऊ धारण करने से व्यक्ति को विशेष लाभ मिलते हैं लेकिन इसे धारण करने समय कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे। आइए जानते है जनेऊ के लाभ और नियम।

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    Janeu Wearing Rules ध्यान रखें जनेऊ के ये नियम।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Janeu Wearing Rules: जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है, जिसे संस्कृत में यज्ञोपवीत कहा जाता है। हिंदू धर्म में जनेऊ संस्कार को जरूरी माना जाता है। साथ हिंदू शास्त्रों में इसके कई लाभ भी बताए गए हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है बल्कि, वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी है। लेकिन व्यक्ति द्वारा जनेऊ से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना गया है।

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    क्या होता है जनेऊ

    जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है, जिसे अपने बाएं कंधे के ऊपर से दाईं भुजा के नीचे तक पहना जाता है। यज्ञोपवीत के एक तार में तीन-तीन तार होते हैं। इस तरह जनेऊ में कुल नौ तार होते हैं, जो शरीर के नौ द्वार का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, इसमें लगाई जाने वाली पांच गांठ ब्रह्म, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक मानी गई हैं।

    मिलते हैं ये लाभ

    माना जाता है कि जनेऊ धारण करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। कहा जाता है कि जनेऊ पहनने वाले से नकारात्मकता दूर बनी रहती है और उसके आसपास बुरी शक्तियों नहीं आती। साथ ही यह भी माना जाता है कि जनेऊ धारण करने वाले व्यक्ति को बुरे सपने नहीं आते और जीवन में सकारात्मक बनी रहती है।

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    इन नियमों का जरूर रखें ध्यान

    जनेऊ से जुड़े नियमों का भी विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे। मल-मूत्र विसर्जन के पूर्व दाहिने कान पर चढ़ा लें और हाथों को धोने के बाद ही इसे कान से उतारना चाहिए। यदि जनेऊ का कोई तार टूट गया है, तो इसे बदल लें। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि जनेऊ को तभी उतारना चाहिए जब आप नया यज्ञोपवीत धारण कर लें।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'