क्या आप भी भोग में भूल जाते हैं तुलसी? पढ़ें इसके बिना पूजा क्यों मानी जाती है अधूरी
भगवान विष्णु या कृष्ण जी को भोग लगाते समय तुलसी का पत्ता क्यों डाला जाता है? जानिए भोग लगाने का सही तरीका।

तुलसी के पत्ते का महत्व (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि जब भी हम भगवान को, खासकर भगवान विष्णु या कृष्ण जी को भोग लगाते हैं, तो उसमें तुलसी का पत्ता क्यों जरूर डालते हैं? हमारे घरों में बड़े-बुजुर्ग हमेशा से ऐसा करते आए हैं। आइए, इसके पीछे की वजह और भोग लगाने के सही नियमों को समझते हैं।
तुलसी के बिना अधूरा है भगवान का भोग
धार्मिक ग्रंथों में साफ बताया गया है कि श्री हरि यानी भगवान विष्णु और उनके सभी अवतारों को तुलसी बहुत प्रिय है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी माता को देवी लक्ष्मी का ही एक रूप माना गया है। यही वजह है कि विष्णु जी तुलसी के बिना कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते। आप चाहे कितनी भी स्वादिष्ट खीर, हलवा या मिठाई बना लें लेकिन अगर उसमें एक तुलसी का पत्ता नहीं डाला गया है, तो वह भोग भगवान तक नहीं पहुंचता।
क्या है भोग लगाने का सही तरीका?
भगवान को भोजन अर्पित करना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि हमारा प्रेम और भाव है। इसलिए, भोजन बनाते समय मन एकदम साफ और रसोई शुद्ध होनी चाहिए।
- खाना बनाते समय भगवान का मन ही मन ध्यान करें।
- जो भी खाना भगवान के लिए बन रहा हो, उसे भोग लगाने से पहले खुद न चखें।
- भोग को हमेशा एक साफ-सुथरे बर्तन में निकालकर भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने रखना चाहिए।
- भोग लगाते समय घंटी बजाना और "ॐ प्राणाय स्वाहा" जैसे मंत्र बोलना बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे भोजन की पवित्रता और भी ज्यादा बढ़ जाती है।
किन चीजों का भोग बिल्कुल न लगाएं?
भगवान को हमेशा सात्विक भोजन ही चढ़ाया जाता है। इसलिए भोग के खाने में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता, क्योंकि इन्हें तामसिक प्रवृत्ति का माना गया है। इसके अलावा, भगवान को कभी बासी खाने का भोग भी नहीं लगाना चाहिए (पंचामृत जैसी कुछ खास चीजों को छोड़कर)। हमेशा ताजा बना हुआ खाना ही अर्पित करें।
प्रसाद बांटने की परंपरा
जब हम भगवान को भोजन अर्पित कर देते हैं, तो वह साधारण खाना नहीं रहता, बल्कि एक पवित्र 'प्रसाद' बन जाता है। इस प्रसाद को परिवार और बाकी लोगों में बांटने की परंपरा है। माना जाता है कि इसे खुशी-खुशी खाने से जीवन में सुख, शांति और बरकत आती है।
यह भी पढ़ें- हरतालिका तीज के बाद आ रहे हैं सुहागिनों के 4 बड़े व्रत: करवा चौथ से लेकर तुलसी विवाह तक, नोट करें सही तारीखें
यह भी पढ़ें- राधा अष्टमी पर तुलसी पूजा क्यों मानी जाती है जरूरी? सही पूजन विधि से खुल सकती है किस्मत
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
