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    Vivah Mantra: देख रहे हैं 'चट मंगनी पट ब्याह' के सपने, तो रोजाना जरूर करें इन मंत्रों का जाप

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Wed, 10 May 2023 06:39 PM (IST)

    Vivah Mantra ज्योतिषियों की मानें तो लड़कियों की शादी के कारक गुरु माने जाते हैं तो लड़कों की शादी के कारक शुक्र माने जाते हैं। अविवाहित लड़कियों को गुरु मजबूत करने के लिए गुरुवार का व्रत करना चाहिए। साथ ही भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा उपासना करनी चाहिए।

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    Vivah Mantra: देख रहे हैं 'चट मंगनी पट ब्याह' के सपने, तो रोजाना जरूर करें इन मंत्रों का जाप

    नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क | Vivah Mantra: ज्योतिष कुंडली और हस्त रेखा के माध्यम से विवाह की गणना करते हैं। जिन जातकों की कुंडली में देवगुरु बृहस्पति और शुक्र मजबूत होते हैं। उनकी शादी शीघ्र हो जाती है। ज्योतिषियों की मानें तो लड़कियों की शादी के कारक गुरु माने जाते हैं, तो लड़कों की शादी के कारक शुक्र माने जाते हैं। अविवाहित लड़कियों को गुरु मजबूत करने के लिए गुरुवार का व्रत करना चाहिए। साथ ही जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा उपासना करनी चाहिए। वहीं, लड़कों को कुंडली में शुक्र को मजबूत करने के लिए देवों के देव महादेव की पूजा करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि शिव जी की पूजा करने से अविवाहितों की शीघ्र शादी हो जाती है। इसके लिए लड़के और लकड़ियां दोनों सोमवार का व्रत करते हैं। अगर आपकी शादी में भी बाधा आ रही है, तो आप पूजा- पाठ के साथ निम्न मंत्रों का जाप अवश्य करें। इन मंत्रों के जाप से शीघ्र शादी के योग बनते हैं। साथ ही कुंडली में गुरु और शुक्र मजबूत होता है। आइए जानते हैं-

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    शीघ्र शादी के लिए लड़के निम्न मंत्र का जाप करें-

    1.

    “ॐ गं गणपतये नमः”

    2.

    ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:

    3.

    “ॐ सृष्टिकर्ता मम विवाह कुरु कुरु स्वाहा”

    4.

    पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।

    तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।।

    शुक्र स्त्रोत

    नमस्ते भार्गव श्रेष्ठ देव दानव पूजित ।

    वृष्टिरोधप्रकर्त्रे च वृष्टिकर्त्रे नमो नम: ।।

    देवयानीपितस्तुभ्यं वेदवेदांगपारग: ।

    परेण तपसा शुद्ध शंकरो लोकशंकर: ।।

    प्राप्तो विद्यां जीवनाख्यां तस्मै शुक्रात्मने नम: ।

    नमस्तस्मै भगवते भृगुपुत्राय वेधसे ।।

    तारामण्डलमध्यस्थ स्वभासा भसिताम्बर: ।

    यस्योदये जगत्सर्वं मंगलार्हं भवेदिह ।।

    अस्तं याते ह्यरिष्टं स्यात्तस्मै मंगलरूपिणे ।

    त्रिपुरावासिनो दैत्यान शिवबाणप्रपीडितान ।।

    विद्यया जीवयच्छुक्रो नमस्ते भृगुनन्दन ।

    ययातिगुरवे तुभ्यं नमस्ते कविनन्दन ।।

    बलिराज्यप्रदो जीवस्तस्मै जीवात्मने नम: ।

    भार्गवाय नमस्तुभ्यं पूर्वं गीर्वाणवन्दितम ।।

    जीवपुत्राय यो विद्यां प्रादात्तस्मै नमोनम: ।

    नम: शुक्राय काव्याय भृगुपुत्राय धीमहि ।।

    नम: कारणरूपाय नमस्ते कारणात्मने ।

    स्तवराजमिदं पुण्य़ं भार्गवस्य महात्मन: ।।

    य: पठेच्छुणुयाद वापि लभते वांछित फलम ।

    पुत्रकामो लभेत्पुत्रान श्रीकामो लभते श्रियम ।।

    राज्यकामो लभेद्राज्यं स्त्रीकाम: स्त्रियमुत्तमाम ।

    भृगुवारे प्रयत्नेन पठितव्यं सामहितै: ।।

    अन्यवारे तु होरायां पूजयेद भृगुनन्दनम ।

    रोगार्तो मुच्यते रोगाद भयार्तो मुच्यते भयात ।।

    यद्यत्प्रार्थयते वस्तु तत्तत्प्राप्नोति सर्वदा ।

    प्रात: काले प्रकर्तव्या भृगुपूजा प्रयत्नत: ।।

    सर्वपापविनिर्मुक्त: प्राप्नुयाच्छिवसन्निधि: ।।

    लड़कियां शीघ्र शादी के लिए निम्न मंत्र का जाप करें-

    1.

    “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरूवे नम:”

    2.

    “ॐ सृष्टिकर्ता मम विवाह कुरु कुरु स्वाहा”

    3.

    “ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नामः”

    4.

    “क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा”

    5.

    -ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।

    नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:॥

    गुरु स्तुति

    अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।

    तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया ।

    चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।

    गुरुरेव परम्ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    स्थावरं जङ्गमं व्याप्तं यत्किञ्चित्सचराचरम् ।

    तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    चिन्मयं व्यापियत्सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम् ।

    तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    त्सर्वश्रुतिशिरोरत्नविराजित पदाम्बुजः ।

    वेदान्ताम्बुजसूर्योयः तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    चैतन्यः शाश्वतःशान्तो व्योमातीतो निरञ्जनः ।

    बिन्दुनाद कलातीतः तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    ज्ञानशक्तिसमारूढः तत्त्वमालाविभूषितः ।

    भुक्तिमुक्तिप्रदाता च तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    अनेकजन्मसम्प्राप्त कर्मबन्धविदाहिने ।

    आत्मज्ञानप्रदानेन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    शोषणं भवसिन्धोश्च ज्ञापणं सारसम्पदः ।

    गुरोः पादोदकं सम्यक् तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    न गुरोरधिकं तत्त्वं न गुरोरधिकं तपः ।

    तत्त्वज्ञानात्परं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    मन्नाथः श्रीजगन्नाथः मद्गुरुः श्रीजगद्गुरुः ।

    मदात्मा सर्वभूतात्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    गुरुरादिरनादिश्च गुरुः परमदैवतम् ।

    गुरोः परतरं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

    डिसक्लेमर: इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।