अघोरी कैसे बनते हैं? श्मशान की साधना और अघोर पंथ के वो 5 कठिन नियम जो सबके बस की बात नहीं
अघोर पंथ में प्रवेश करना बेहद कठिन है। अघोरी भगवान शिव के 'भैरव' रूप के उपासक होते हैं। जानिए 12 ...और पढ़ें

कैसे करते हैं अघोरी का रूप धारण (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अघोर पंथ 'अघोर' शब्द से बना है, जिसका अर्थ है- 'जो घोर न हो', यानी जो सरल और सहज हो। अघोरी भगवान शिव के 'भैरव' रूप के उपासक होते हैं। उनके लिए दुनिया में कुछ भी बुरा या अशुद्ध नहीं है। वे गंदगी में भी ईश्वर को देखते हैं और श्मशान को अपना घर मानते हैं।
अघोर पंथ हिंदू धर्म के सबसे रहस्यमयी और कठिन आध्यात्मिक मार्गों में से एक है। अक्सर लोग अघोरियों को देखकर डर या जिज्ञासा महसूस करते हैं, लेकिन उनकी जीवनशैली के पीछे एक गहरा दर्शन छिपा होता है।
अघोरी बनने का कठिन रास्ता
अघोरी बनना कोई एक दिन का काम नहीं है। इसके लिए वर्षों की कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ता है:
12 वर्षों की कठिन साधना: किसी भी व्यक्ति को पूर्ण अघोरी बनने के लिए लगभग 12 साल तक कठिन साधना करनी पड़ती है। इस दौरान उन्हें अपने गुरु के सानिध्य में रहकर अघोर विद्या के गुण सीखने होते हैं।
मोह-माया का पूर्ण त्याग: अघोरी बनने की पहली शर्त है परिवार, समाज और सांसारिक सुखों का पूर्ण त्याग। उन्हें अपने जीवित रहते हुए अपना 'पिंडदान' करना पड़ता है। जिसका अर्थ है कि वे सांसारिक रूप से मृत हो चुके हैं।

(Image Source: Free)
गुरु का महत्व: बिना गुरु के अघोर पंथ में प्रवेश असंभव है। गुरु ही तय करता है कि शिष्य इस कठिन मार्ग के लिए तैयार है या नहीं।
अघोरियों के वो 5 गुप्त नियम
श्मशान में निवास: अघोरी श्मशान घाटों पर ही निवास करते हैं। उनका मानना है कि श्मशान शिव का वास है। यहीं पर जन्म-मृत्यु के चक्र को सबसे करीब से समझा जा सकता है।
भस्म का लेप: अघोरी अपने शरीर पर चिता की राख (भस्म) मलते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि एक दिन यह शरीर भी मिट्टी में मिल जाएगा।
ब्रह्मचर्य और साधना: अघोरी ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। हालांकि, उनकी कुछ साधनाएं शवों के साथ भी होती हैं (शव साधना), जो बेहद गुप्त और डरावनी मानी जाती हैं।
भोजन के नियम: अघोरी खाने-पीने में कोई भेदभाव नहीं करते। वे वह सब कुछ ग्रहण कर सकते हैं जिसे समाज 'अपवित्र' मानता है। यह 'अद्वैत' भाव को प्राप्त करने का एक तरीका है।
नरमुंड (कपाल) धारण करना: अघोरी हमेशा अपने पास एक मानव खोपड़ी रखते हैं, जिसे 'कपाल' कहा जाता है। वे इसी में भोजन और जल ग्रहण करते हैं।
यह भी पढ़ें- शिवलिंग पर जल ही नहीं, ये चीजें चढ़ाने से भी प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ, क्या कहता है शिव पुराण?
यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat के दिन करें शिव तांडव स्तोत्र का पाठ, महादेव की कृपा से मनोकामनाएं होंगी पूरी
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
