चंद्रमा की कितनी पत्नियां थीं और कौन थी उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय? शिव पुराण के इस रहस्य को पढ़ें
पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्र देव की 27 पत्नियां थीं, जो दक्ष प्रजापति की पुत्रियां थीं और नक्षत्रों का स्वरूप ...और पढ़ें

चंद्रमा की 27 पत्नियां कौन थीं और रोहिणी क्यों थीं सबसे प्रिय (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
चंद्र देव की 27 पत्नियां दक्ष प्रजापति की पुत्रियां थीं।
रोहिणी चंद्र देव की सबसे प्रिय पत्नी मानी जाती थीं।
दक्ष के श्राप से चंद्रमा घटते-बढ़ते हैं और अदृश्य होते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर जब हम आसमान में चंद्रमा को घटते और बढ़ते हुए देखते हैं, तो मन में कई सवाल आते हैं। यही नहीं इसकी खूबसूरती भी निराली है और पूर्णिमा तिथि पर जब चांद अपनी सोलह कलाओं से युक्त होता है, तब इसके सौंदर्य की बात ही अलग होती है।
पौराणिक कथाओं में, चांद की उस चमकती हुई छवि को 'चंद्र देव' के रूप में देखा जाता है जो सुंदरता, शांति और आकर्षण के प्रतीक हैं। वहीं इनकी कलाओं से लेकर नक्षत्रों और घटते-बढ़ते आकार की भी अपनी अलग कहानियां हैं जिनका वर्णन पुराणों में मिलता है। चंद्र देव के जीवन की कथा में उनकी पत्नियों की गाथा बहुत अद्भुत है।
आइए आपको बताते हैं उनकी कितनी पत्नियां थीं और उनमें से सबसे प्रिय कौन थीं और इसके बारे में शिव पुराण में क्या लिखा है?
चंद्रदेव की कितनी पत्नियां थीं?
शिव पुराण की कथाओं के नानुसार चंद्रदेव की 27 पत्नियां थीं जो कि दक्ष प्रजापति की पुत्रियां थीं। दक्ष की 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव के साथ हुआ था।
उनकी पत्नियों के नाम- रोहिणी, रेवती, श्रावण, सर्विष्ठ, सताभिषक,प्रोष्ठपदस, अश्वयुज, कृतिका, मृगशिरा,आद्रा, पुनर्वसु, मेघा, स्वाति, चित्रा, फाल्गुनी, हस्ता, राधा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूला, सुन्निता, पुष्य अश्व्लेशा, अषाढ़, अभिजीत और भरणी हैं।
ऐसा कहा जाता है कि चंद्रदेव ने प्रजापति दक्ष की 27 बेटियों से विवाह किया और इन्हें आज भी नक्षत्रों के रूप में देखा जाता है। ये सभी 27 नक्षत्र चंद्रदेव के चारों ओर एक सुंदर बनाकर रात के आकाश में शोभायमान थे। हालांकि चंद्रमा अपनी सभी पत्नियों के एक समान नहीं देखते थे और इनमें से एक ही उनकी प्रिय पत्नी थीं।
कौन थीं चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी?
भले ही चंद्रदेव की 27 पत्नियां थीं, लेकिन उनमें से सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी थीं। चंद्रदेव रोहिणी के प्रेम में इतने आसक्त थे कि विवाह के बाद भी अन्य सभी पत्नियों को अपने मायके यानी कि दक्ष प्रजापति के घर पर ही रहना पड़ता था। रोहिणी के प्रति प्रेम ने अन्य पत्नियों से चंद्रमा को विरक्त कर दिया और वो अपने कर्तव्यों को भी भूलने लगे।
उस समय उनकी अन्य पत्नियों यानी सभी नक्षत्रों ने पिता प्रजापति दक्ष से शिकायत की और दक्ष ने चंद्रदेव को श्राप दिया कि वो अपनी सारी चमक और सौंदर्य खो देंगे और उनकी रोशनी धीरे-धीरे लुप्त होने लगेगी। उस समय चंद्रदेव के लिए यह श्राप विनाशकारी सिद्ध होने वाला था।
जब चंद्रदेव ने दक्ष के श्राप को किया अनदेखा
चंद्रमा उस समय रोहिणी के प्रेम में इतने आसक्त थे कि उन्होंने दक्ष प्रजापति के श्राप को भी अनदेखा कर दिया। उन्हें विश्वास था कि उनकी दिव्य आभा को कोई समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन उसी समय चंद्रमा को आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी और दक्ष के श्राप ने चंद्रदेव की जीवन शक्ति और उनके तेज को नष्ट करना शुरू कर दिया, उनकी किरणें लुप्त होती गई और वे पीले पड़ने लगे।
उस समय उनकी सभी नक्षत्र पत्नियां जो चंद्रमा की तेजस्विता पर गर्व करती थीं वो भी अब भयभीत हो गईं उन्हें ऐसा लगा कि यदि चंद्रदेव पूरी तरह नष्ट हो गए तो पृथ्वी पर जीवन समाप्त हो जाएगा।
उस समय सभी नक्षत्रों और देवताओं ने उस समय महादेव की आराधना की और उन्हें श्राप से बाहर आने में मदद मिली, लेकिन आज भी उसी श्राप के प्रभाव से पूर्णिमा तिथि के बाद से चंद्रदेव धीरे-धीरे घटने लगते हैं और अमावस्या के दिन उनका तेज समाप्त हो जाता है। इसी वजह से अमावस्या पर चांद नहीं दिखाई देता है।
चंद्रदेव की सभी पत्नियां और नक्षत्रों का संबंध
ऐसा कहा जाता है कि चंद्रमा की सभी पत्नियां 27 नक्षत्रों का ही स्वरूप हैं और उनके नाम भी इन्हीं नक्षत्रों के नाम पर हैं। अगर हम खगोलीय संरचना की बात करें, तो चंद्रमा को पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 27.3 दिन लगते हैं। इस दौरान चंद्रमा हर रात एक नए नक्षत्र के पास से गुजरता है। इसको यदि पौराणिक कथाओं से जोड़ा जाए तो चंद्रमा अपनी सभी पत्नियों के साथ बराबर समय बिताते हैं और एक नक्षत्र के बाद दूसरे नक्षत्र की और प्रवेश करते हैं।
चंद्रदेव की 27 पत्नियों में से रोहिणी उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय इसलिए थीं क्योंकि वो सबसे ज्यादा खूबसूरत थीं और आज भी रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का सबसे सुंदर और प्रिय खास नक्षत्र माना जाता है।
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