गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा को देख लिया तो लगेगा कलंक! इस कथा में छिपा है चंद्र दर्शन न करने का रहस्य
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन वर्जित माने जाते हैं, जिसके पीछे गणेश जी द्वारा चंद्रमा को दिया गया श्राप ...और पढ़ें

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों है वर्जित जानें मिथ्या दोष का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखना 'मिथ्या दोष' लाता है।
गणेश जी ने चंद्रमा को अहंकार के कारण श्राप दिया था।
गलती से चंद्र दर्शन पर गणेश पूजा और मंत्र जाप करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणपति को सुखकर्ता और दुखहर्ता के नाम से जाना जाता है ये सभी विघ्नों को दूर करने वाले होते हैं। किसी भी शुभ काम का आरंभ करने से पहले गणेश जी का आह्वाहन करना जरूरी माना जाता है। देवों के देव महादेव और माता पार्वती के पुत्र गणपति का आवाहन सभी देवताओं में सबसे पहले किया जाता है।
गणेश चतुर्थी के दिन को मुख्य रूप से गणेश जी की पूजा की जाते है हुए इसे उनके प्राकट्य दिवस का दिन भी माना जाता है।भक्त इस दिन भगवान गणेश की पूजा करते हैं और सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा की पूजा और चंद्र दर्शन की मनाही होती है। ऐसी मान्यता है कि जो इस दिन चंद्रमा को देखता है उसके जीवन में कलंक लग सकता है। आइए आपको बताते हैं इसके बारे में गणेश पुराण में क्या लिखा है और इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित क्यों है?
गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन क्यों नहीं करने चाहिए?
मुख्य रूप से गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से मना किया जाता है, इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। एक बार की बात है गणेश जी ने अपने माता-पिता को अपनी बुद्धि विवेक और कौशल द्वारा सकल ब्रह्मांड का स्वरूप मानकर उनकी परिक्रमा की और तभी भगवान शिव ने उनकी बुद्धिमता और माता-पिता के प्रति समर्पण को देखकर उनको सभी देवी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया।
जब सभी देवता गणेश जी का दर्शन करने कैलाश आए तो अप्सरा और गंधर्व नृत्य करने लगे, लेकिन आकाश में शोभायमान चंद्रदेव मंद-मंद मुस्कुराते रहे, क्योंकि उन्हें अपने रूप रंग का अहंकार था और वो गणेश जी का स्वरूप देख वो उनका परिहास करने लगे।
चंद्रमा ने गणपति का अपमान किया और क्रोधवश गणेश जी ने चंद्रमा को कलंकित होने का श्राप दे दिया। जैसे ही चंद्रमा की कांति निस्तेज हो गई उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने गणपति से क्षमा मांगी।
इस समय गणपति ने चंद्रमा से कहा कि तुम सूर्य के प्रकाश से पूर्णिमा पर ही पूरी तरह प्रकाशित होंगे और सोलह कलाओं से युक्त होंगे, लेकिन गणेश चतुर्थी के दिन को तुम्हें दंड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इस दिन को याद करके कोई भी अपने रूप रंग पर अभिमान नहीं करेगा और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन जो भी चंद्र दर्शन करेगा उस पर मिथ्या कलंक लगेगा।
क्या गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से लगता है कलंक?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करता है उसके ऊपर झूठा कलंक लग सकता है। चंद्रदेव के इस श्राप को 'मिथ्या दोष' कहा जाता है, जिसका अर्थ है किसी ऐसी चीज के लिए गलत आरोप लगना जो आपने नहीं की।
इसी वजह से आज भी इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने वाले के जीवन में ऐसा कोई दोष लग सकता है जिससे उसका कोई संबंध न हो। अगर किसी की नजर इस दिन गलती से चंद्रमा पर पड़ जाए, तो उन्हें सलाह दी जाती है कि वे भगवान गणेश की पूजा करें और 'मिथ्या दोष' से बचने के लिए एक मंत्र पढ़ें- सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥
अगर हम पौराणिक कथाओं और गणेश पुराण में लिखे कारणों की मानें तो आपको गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। यदि आप ऐसा कर भी लें तो गणपति की पूजा और मंत्रों के जाप से किसी भी दोष से मुक्ति मिल सकती है।
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