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चंद्रदेव ने सोने, कृष्ण ने लकड़ी से बनवाया था भारत का पहला ज्योतिर्लिंग, पढ़ें सोमनाथ मंदिर का इतिहास

Published: Fri, 31 Jul 2026 07:00 AM (IST)

भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित है। इसका इतिहास 649 ईसा पूर्व ...और पढ़ें

भारत का पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ  (Picture Credits- AI Image)

भारत का पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव से जुड़े 12 ज्योतिर्लिंगों का जिक्र देखने को मिलता है। भारत में जिस भी स्थानों पर शिव के ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, आज के समय में वहां पर भव्य शिव मंदिरों का निर्माण हो चुका है, जिनके प्रति हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भक्तों के बीच काफी आस्था है।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का जिक्र शिव पुराण के रुद्रसंहिता में देखने को मिलता है। सावन का महीना शुरू हो चुका है। आज सावन का दूसरा दिन यानी 31 जुलाई 2026 के मौके पर हम जानेंगे सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में।

द्वादश ज्योतिर्लिंग को लेकर शिव पुराण में एक श्लोक देखने को मिलता है, जो इस प्रकार है-

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् ।
उज्जयिन्यां महाकालम्ॐकारममलेश्वरम् ॥१॥

परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमाशंकरम् ।
सेतुबंधे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥२॥

वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं गौतमीतटे ।
हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये ॥३॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः ।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥४॥

somnath mandir

सोमनाथ मंदिर 

भारत का प्रथम ज्योतिर्लिंग

गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह के नजदीक प्रभास पाटन अरब सागर तट पर बसा है। भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग यहीं प्रकट हुआ था। वह स्थान जहां भगवान शिव अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे। मंदिर का इतिहास 649 ईसा पूर्व से भी पुराना है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में पुनर्निर्मित किया गया था। मंदिर के उत्तरी भाग में शिव कथा से जुड़े रंगीन चित्र बने हुए हैं।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, चंद्र देवता जिन्हें सोमराज भी कहा जाता है, ने सबसे पहले सोमनाथ में स्वर्ण का मंदिर बनवाया था, बाद में रावण ने इसे चांदी से, कृष्ण न लकड़ी से और भीम ने पत्थर से बनवाया। मंदिर के केंद्र में एक विशाल, काला शिवलिंग है, जो 12 सबसे पवित्र शिव मंदिरों में से एक है, जिन्हें ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है।

मंदिर पर आक्रमण का दौर

सन् 1025 के आखिर में वर्तमान अफगानिस्तान के क्रूर आक्रमणकारी महमूद गजनी ने मंदिर पर आक्रमण किया। बताया जाता है कि, मंदिर उस समय इतना समृद्धि था कि, वहां 300 संगीतकार, 500 नर्तकियां और 300 नाई काम करते थे। दो दिन तक चले युद्ध में महमूद ने शहर और मंदिर पर कब्जा कर लिया, जिसमें अनुमानित 70 हजार से ज्यादा रक्षक मारे गए। इसके बाद उसने मंदिर की अपार संपत्ति लूट ली और संरचना को नष्ट कर दिया। यहीं से विनाश और पुनर्निर्माण का ऐसा दौर चला कि, सदियों तक रुका नहीं। मंदिर को 1297, 1394 और आखिर में 1706 में मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में फिर से नुकसान पहुंचा।

सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय अक्तूबर से फरवरी तक का महीना है, हालांकि भगवान शिव का यह मंदिर सालभर खुला रहता है। शिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा पर यहां बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।

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Source- Gujarat Tourism

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।