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Holi Bhai Dooj 2026: यमराज-यमुना की इस कथा के बिना अधूरा है तिलक, जरूर करें इसका पाठ

Published: Thu, 05 Mar 2026 11:26 AM (IST)

होली भाई दूज (Holi Bhai Dooj 2026) भाई-बहन के प्यार और समर्पण का प्रतीक है।

Holi Bhai Dooj 2026: होली भाई दूज कथा। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। होली के रंगों के बाद आने वाला होली भाई दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। इस साल यह पावन पर्व (Holi Bhai Dooj 2026) 05 मार्च यानी आज मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, भाई दूज के दिन केवल तिलक करना ही काफी नहीं है, बल्कि यमराज और यमुना जी की पौराणिक कथा का पाठ करना इस पर्व की पूजा का अहम हिस्सा है, तो आइए होली भाई दूज की कथा का पाठ करते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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(Ai Generated Image)

होली भाई दूज की कथा (Holi Bhai Dooj 2026 Katha)

भगवान सूर्यदेव की पत्नी संज्ञा की दो संतानें थीं पुत्र यमराज और पुत्री यमुना। यमराज मृत्यु के देवता बने और यमुना जी पृथ्वी पर नदी के रूप में प्रवाहित हुईं। यमुना जी अपने भाई यमराज से बहुत प्यार करती थीं और वह अक्सर उन्हें अपने घर भोजन पर आने का निमंत्रण देती थीं। यमराज अपने काम में व्यस्त रहने की वजह से बहन की बात को टालते रहे। लेकिन एक बार चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को यमराज अचानक अपनी बहन यमुना के घर पहुंच गए। अपने भाई को द्वार पर देख यमुना जी की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने उनका खूब आदर-सत्कार किया। माथे पर तिलक लगाया और अपने हाथों से बना भोजन कराया।

यह सब देखकर यमराज जी नी अपनी बहन यमुना से कोई वरदान मांगने को कहा। तब यमुना जी ने कहा कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाए और उसके हाथ का बना भोजन करे, उसे अकाल मृत्यु न आए। यमराज जी ने 'तथास्तु' कहकर यह वरदान दे दिया। तब से ही भाई दूज की परंपरा चली आ रही है।

कथा पाठ के लाभ

  • इस कथा का पाठ करने से भाई के जीवन पर आने वाले संकट टल जाते हैं।
  • घर में कलह दूर होती है और भाई-बहन के रिश्तों में मधुरता आती है।
  • यमराज न्याय के देवता हैं, उनकी कथा सुनने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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