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Holi Bhai Dooj 2026: भाई दूज के दिन करें धर्मराज जी और देवी यमुना की आरती, भाई की उम्र होगी लंबी

Published: Thu, 05 Mar 2026 09:22 AM (IST)

इस साल भाई दूज (Holi Bhai Dooj 2026) का पर्व 5 मार्च यानी आज के दिन मनाया जा रहा है।

Holi Bhai Dooj 2026: भाई दूज आरती। (Ai Generated Image)

Holi Bhai Dooj 2026: भाई दूज आरती। (Ai Generated Image)

HighLights

  1. इस साल भाई दूज 5 मार्च यानी आज के दिन मनाया जा रहा है

  2. यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है

  3. इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। होली के ठीक अगले दिन भ्रातृ द्वितीया यानी होली भाई दूज मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। साल 2026 में यह पर्व 5 मार्च यानी आज के दिन मनाया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यमुना जी ने अपने भाई यमराज जी को अपने घर भोजन के लिए बुलाया था, जिससे खुश होकर यमराज जी ने उन्हें वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के हाथ का भोजन करेगा और तिलक लगवाएगा, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होगी।

भाई दूज (Holi Bhai Dooj 2026) पर तिलक करने के बाद यमराज जी और देवी यमुना की आरती करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे भाई के जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और उसे लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।

bhai dooj  (5)

यमुना जी की आरती(Aarti Yamuna Ji Ki)

ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता

जो नहावे फल पावे सुख सुख की दाता

ॐ पावन श्री यमुना जल शीतल अगम बहै धारा,

जो जन शरण से कर दिया निस्तारा

ॐ जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे,

यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे

ॐ कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही,

तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेद कही

ॐ आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो,

नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो

ॐ नमो मात भय हरणी शुभ मंगल करणी,

मन ‘बेचैन’ भय है तुम बिन वैतरणी

ॐ ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।

॥धर्मराज जी की आरती॥

धर्मराज कर सिद्ध काज, प्रभु मैं शरणागत हूँ तेरी ।

पड़ी नाव मझदार भंवर में, पार करो, न करो देरी ॥

धर्मराज कर सिद्ध काज...

धर्मलोक के तुम स्वामी, श्री यमराज कहलाते हो ।

जों जों प्राणी कर्म करत हैं, तुम सब लिखते जाते हो ॥

धर्मराज कर सिद्ध काज...

अंत समय में सब ही को, तुम दूत भेज बुलाते हो ।

पाप पुण्य का सारा लेखा, उनको बांच सुनते हो ॥

भुगताते हो प्राणिन को तुम, लख चौरासी की फेरी ॥

धर्मराज कर सिद्ध काज...

चित्रगुप्त हैं लेखक तुम्हारे, फुर्ती से लिखने वाले ।

अलग अगल से सब जीवों का, लेखा जोखा लेने वाले ॥

धर्मराज कर सिद्ध काज...

पापी जन को पकड़ बुलाते, नरको में ढाने वाले ।

बुरे काम करने वालो को, खूब सजा देने वाले ॥

कोई नही बच पाता न, याय निति ऐसी तेरी ॥

धर्मराज कर सिद्ध काज...

दूत भयंकर तेरे स्वामी, बड़े बड़े दर जाते हैं ।

पापी जन तो जिन्हें देखते ही, भय से थर्राते हैं ॥

धर्मराज कर सिद्ध काज...

बांध गले में रस्सी वे, पापी जन को ले जाते हैं ।

चाबुक मार लाते, जरा रहम नहीं मन में लाते हैं ॥

नरक कुंड भुगताते उनको, नहीं मिलती जिसमें सेरी ॥

॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥

धर्मी जन को धर्मराज, तुम खुद ही लेने आते हो ।

सादर ले जाकर उनको तुम, स्वर्ग धाम पहुचाते हो ।

धर्मराज कर सिद्ध काज...

जों जन पाप कपट से डरकर, तेरी भक्ति करते हैं ।

नर्क यातना कभी ना करते, भवसागर तरते हैं ॥

कपिल मोहन पर कृपा करिये, जपता हूँ तेरी माला ॥

धर्मराज कर सिद्ध काज...

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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