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    Hindu Marriage: नई दुल्हन की हल्दी की छाप से बनी रहती हैं खुशियां, जानिए इस रस्म का महत्व

    Hindu Marriage हिंदू धर्म में विवाह आदि में कई तरह की रस्में निभाई जाती है। शादी में निभाई जाने वाली अधिकतर रस्मों के पीछे वैज्ञानिक कारण भी मौजूद होते हैं। आपने हिंदू विवाह में दुल्हन के ग्रह प्रवेश पर उसे घर में हल्दी की छाप लगाते हुए जरूर देखा होगा। आइए जानते हैं कि इस रस्म का क्या महत्व है।

    By Suman SainiEdited By: Suman SainiUpdated: Sat, 24 Jun 2023 05:10 PM (IST)
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    Hindu Marriage नई दुल्हन से क्यों कराई जाती है हल्दी की छाप की रस्म।

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Hindu Marriage: शादी-विवाह में किए जाने वाले रीति-रिवाज उसे और भी खास बना देते हैं। हिंदू धर्म में विवाह कई दिनों तक चलने वाला त्योहार ही है। हिन्दू धर्म में सभी रीति-रिवाजों का धार्मिक कारण होता है। विवाह आदि में कई तरह की रस्में निभाई जाती हैं, और सभी का अपना महत्व होता है। ऐसी ही एक रस्म हैं नई दुल्हन प्रवेश द्वार हाथों के पंजों से हल्दी की छाप लगाना। आइए जानते हैं इस रस्म का क्या धार्मिक महत्व है। 

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    क्या है हल्दी का महत्व

    हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से माना गया है। बृहस्पति ग्रह वैवाहिक जीवन में खुशियों का कारक माना जाता है। यही कारण है कि नई दुल्हन के ग्रह प्रवेश पर घर में हल्दी की छाप लगवाई जाती है। इससे बृहस्पति भगवान का आशीष प्राप्त होता है। इस रस्म को निभाते समय यह कामना की जाती है कि इससे नए जोड़े के जीवन में बृहस्पति ग्रह का शुभ प्रभाव बना रहेगा।

    किस भगवान को प्रिय है हल्दी

    पूजा-पाठ में हल्दी के प्रयोग का विशेष महत्व है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को हल्दी अति प्रिय है। हल्दी की छाप वाली रस्म को करने से भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी कृपा नवविवाहित दंपत्ति को मिलती है।

    सुख-समृद्धि का होता है आगमन

    हल्दी को शुभता का प्रतीक माना गया है। इसलिए नई दुल्हन से घर में हल्दी की छाप लगवाई जाती है। ऐसा करने से सारे कष्ट दूर होते हैं। . हल्दी की छाप वैवाहिक जीवन के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। इससे घर में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'