हरतालिका तीज का व्रत इस खास विधि से खोलेंगी तो मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद और मनचाहा वर
हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2026) का व्रत सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं अखंड सौभाग्य व मनचाहे वर के लिए रखती ...और पढ़ें

कैसे करें हरतालिका तीज व्रत का पारण (AI-Generated image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2026) का पर्व खास माना जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं। यह व्रत बेहद कठिन और फलदायी माना जाता है। इस अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को सच्चे मन से करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कुंवारी कन्याओं को मिलेगा मनचाहा वर प्राप्त होता है। इस व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका विधिपूर्वक पारण किया जाए। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि हरतालिका तीज व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए।
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हरतालिका तीज 2026 डेट और टाइम (Hartalika Teej 2026 Date and Time)
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर को सुबह 07 बजकर 08 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 14 सितंबर को सुबह 07 बजकर 06 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत 14 सितंबर को किया जाएगा।
हरतालिका तीज व्रत पारण टाइम (Hartalika Teej Vrat Paran Time)
हरतालिका तीज व्रत का पारण अगले दिन यानी चतुर्थी तिथि की सुबह किया जाता है। हरतालिका तीज व्रत का पारण 15 सितंबर को सुबह किया जाएगा। व्रत का पारण सुबह स्नान कर पूजा-अर्चना करने के बाद करना चाहिए। साथ ही इस दिन दान करने का अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
हरतालिका तीज व्रत पारण विधि (Hartalika Teej Vrat Paran Vidhi)
- चतुर्थी तिथि के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
- मंदिर में गंगाजल का छिड़काव कर उसे शुद्ध करें।
- विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें।
- मंत्रों का जप करें।
- वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।
- सात्विक चीजों का भोग लगाएं।
- पूजा के बाद शिव-पार्वती की जो मूर्तियां बनाई हैं, उन्हें पवित्र नदी में विसर्जित कर दें या फिर किसी पेड़ के पास रख दें।
- व्रत का पारण करने से पहले किसी सुहागिन महिला को सुहाग की सामग्री का दान करें। जैसे- चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि।
- अब सात्विक भोजन या फल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
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