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हरतालिका तीज 2026: शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर ही क्यों की जाती है पूजा? शिव पुराण में छिपा है रहस्य

Published: Tue, 01 Sep 2026 07:50 PM (IST)

हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है। आइए इसके महत्व के बारे में जानें।

शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा पूजा का रहस्य और महत्व (Picture Credit: AI Generated)

शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा पूजा का रहस्य और महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. हरतालिका तीज पर मिट्टी के शिव-पार्वती की पूजा होती है।

  2. माता पार्वती ने शिव को पाने मिट्टी का शिवलिंग बनाया था।

  3. मिट्टी के शिवलिंग की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत त्योहारों का देश है, जहां आस्था और परंपरा के अनुसार किसी भी व्रत और पर्व को श्रद्धा से मनाया जाता है। इनमें से एक पर्व है 'हरतालिका तीज' का। यह व्रत प्यार, भक्ति और भगवान शिव व माता पार्वती के पवित्र मिलन को समर्पित है। 

हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह व्रत रखा जाता है। इस दिन मुख्य रूप से सुहागिन महिलाऐं पति की दीर्घायु की कामना में उपवास रखती हैं और अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की चाह में व्रत का पालन करती हैं। यह व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है और इसे निर्जला रखा जाता है।

जिसमें व्रत रखने वाली महिलाएं न तो कुछ खाती हैं और न ही पानी पीती हैं। इस दिन महिलाएं शिव जी की भक्ति में लीन होकर व्रत का पालन करती हैं। हरतालिका तीज के दिन मुख्य रूप से पूजा के कुछ नियम बनाए गए हैं जिससे पूजा की पूर्णता होती है। इन्हीं नियमों में से एक है मिट्टी के शिव और पार्वती बनाकर उनकी पूजा करना। आइए जानें क्यों इस दिन शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा की जाती है।

हरतालिका तीज पर मिट्टी के शिवलिंग क्यों बनाए जाते हैं?

इस पर्व की कथाओं के अनुसार माता सती ने देह त्यागने के बाद हिमवान और हेमावती के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया था। उस समय माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थीं।

अपनी इस मनोकामना को पूरा करने के लिए माता ने घोर तपस्या की और उनकी इसी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने माता पार्वती को अपनी वामांगी के रूप में स्वीकार किया।

ऐसा माना जाता है कि जंगलों में तपस्या के दौरान माता पार्वती ने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर सालों तक उसी की उपासना की थी, इसी वजह से आज भी यह परंपरा चली आ रही है कि महिलाएं पूजा के समय मिट्टी के शिव और पार्वती बनाकर उनकी पूजा करती हैं।

पुराणों में क्या है इस व्रत की कथा

शिव पुराण में इस प्रथा की कथा के बारे में बताया गया है। इसमें बताया गया है कि प्राचीन समय में जब माता पार्वती शिव जी से विवाह करना चाहती थीं उस समय उनके पिता इसके विपरीत थे। उस समय पार्वती जी ने निश्चय किया कि वो अपने तप से शिव जी को पति के रूप में पाएंगी।

उस समय उनकी सहेली ने पार्वती जी की एक घने जंगल में छिपने में मदद की। माता पार्वती ने पूरी श्रद्धा से पूजा करने के लिए अपने हाथों से रेत और मिट्टी से शिवलिंग और भगवान शिव की मूर्तियां बनाईं और उनकी पूजा शुरू कर दी। उनकी इसी तपस्या के परिणामस्वरूप माता पार्वती को शिव जी पति रूप में मिले।

मिट्टी के शिवलिंग की पूजा से पूर्ण होती हैं मनोकामनाएं

ऐसा माना जाता है कि आज भी जो महिला हरतालिका तीज के दिन मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा करती है, उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ति होती है। यही नहीं मिट्टी से बने शिवलिंग को सबसे शुद्ध माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं में मिट्टी और रेत की मूर्तियों का अस्थायी और पृथ्वी से जुड़ा स्वरूप सबसे पवित्र माना जाता है और इनकी पूजा से पूर्ण फल मिलते हैं। इसका एक उद्देश्य यह भी होता है कि इन मूर्तियों की पूजा के बाद इन्हें किसी नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। मिट्टी में बने शिवलिंग को पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है और इनकी पूजा से ही पूजा का पूर्ण फल मिलता है।

अगर आप भी हरतालिका तीज के दिन व्रत और पूजा करती हैं, तो मिट्टी के शिव-पार्वती बनाकर ही उनकी पूजा करें।

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