गोवर्धन पूजा पर 7 परिक्रमा ही क्यों की जाती है? पढ़ें वो रहस्य जो दिलाएगा चार धाम का पुण्य
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को मनाई जाएगी, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है। इस दिन 7 ...और पढ़ें
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गोवर्धन पूजा पर परिक्रमा लगाने के नियम (Picture Credits- AI Images)
HighLights
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को, श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा।
घर में गोवर्धन बनाकर 7 परिक्रमा करने का विधान।
परिक्रमा से चार धाम पुण्य और सुख-समृद्धि मिलती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा का पर्व 10 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस अवसर पर लोग अपने-अपने घरों में गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा-अर्चना करते हैं और साथ ही परिक्रमा लगाते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गोवर्धन पर्वत की पूजा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में आने वाले सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि गोवर्धन पूजा के दौरान परिक्रमा करने से चार धाम की तीर्थयात्रा के समान पुण्य मिलता है और पाप नष्ट होते हैं। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि गोवर्धन पूजा पर कितनी परिक्रमा करनी चाहिए, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। आइए इस आर्टिकल में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
कितनी परिक्रमा करना शुभ होता है?
अगर आप गोवर्धन पूजा के दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा कर रहे हैं, तो 7 परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि संख्या 7 उन 7 दिनों का प्रतीक है, जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाया था।
परिक्रमा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय ध्यान रखें कि गोवर्धन पर्वत हमेशा आपकी दाहिनी ओर रहे।
- परिक्रमा के दौरान एक लोटे में जल या कच्चा दूध लेकर चलें और उसे चारों तरफ गिराते हुए चलें। साथ ही खील और बताशे भी अर्पित करते हुए चलें।
- इस बात का विशेष ध्यान रखें कि परिक्रमा नंगे पैर ही करनी चाहिए। नंगे पैर परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।
- इसके अलावा परिक्रमा के दौरान भूलकर भी काले रंग के कपड़े धारण न करें। ऐसा माना जाता है कि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जिसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
- जहां से आपने परिक्रमा की शुरुआत की है, वहीं पर इसका समापन करें। परिक्रमा को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। माना जाता है कि ऐसी गलती करने से पूजा सफल नहीं होती है।
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