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    Gauri Pujan: शादी की मुश्किलें होंगी दूर, ऐसे करें मां गौरी को प्रसन्न

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Sun, 07 Jan 2024 02:16 PM (IST)

    Gauri Pujanदेवी गौरी मां दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं। वे आदर्श साथी का प्रतीक भी हैं। ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं मां गौरी की पूजा करती हैं उन्हें मनचाही शादी का वरदान मिलता है। मां गौरी चार भुजाओं वाली नंदी जी पर बैठी हुई दिखाई देती है। मां गौरी (Maa Gauri) शांति और पवित्रता का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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    Gauri Mantra: गौरी मंत्र का विशेष महत्व

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली।Gauri Mantra: सनातन धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। मंत्र की सहायता से विभिन्न ऊर्जाओं को प्राप्त किया जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि मंत्र हमारी सुप्त चेतना को जगाने की दुर्लभ क्षमता वाला एक दिव्य यंत्र है, जो हमारी अंदर की शक्तियों को विकसित करने में मदद करता है और हमारी मूल महानता को सामने लाता है।

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    गौरी मंत्र का महत्व

    देवी गौरी मां दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं। वे आदर्श साथी का प्रतीक भी हैं। ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं मां गौरी की पूजा करती हैं, उन्हें मनचाही शादी का वरदान मिलता है। मां गौरी चार भुजाओं वाली, नंदी जी पर बैठी हुई दिखाई देती है। मां गौरी शांति और पवित्रता का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    यहां दिया गया गौरी मंत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जिनकी शादी होने में समस्या आ रही है या फिर जिनकी कुंडली में मंगल दोष है। आपको बता दें, देवी सीता ने भी अपने मनचाहे जीवनसाथी भगवान राम से विवाह के लिए इस गौरी मंत्र का जाप किया था, जो इस प्रकार है -

    ।।गौरी स्तुति।।

    जय जय गिरिबरराज किसोरी।

    जय महेस मुख चंद चकोरी॥

    जय गजबदन षडानन माता।

    जगत जननि दामिनी दुति गाता॥

    देवी पूजि पद कमल तुम्हारे।

    सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥

    मोर मनोरथ जानहु नीकें।

    बसहु सदा उर पुर सबही कें॥

    कीन्हेऊँ प्रगट न कारन तेहिं।

    अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥

    बिनय प्रेम बस भई भवानी।

    खसी माल मुरति मुसुकानि॥

    सादर सियँ प्रसादु सर धरेऊ।

    बोली गैरी हरषु हियँ भरेऊ॥

    सुनु सिय सत्य असीस हमारी।

    पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥

    नारद बचन सदा सूचि साचा।

    सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥

    मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।

    करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥

    एही भाँती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियँ हरषीं अली।

    तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥

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    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'