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Dussehra 2026: प्रदोष काल में ही क्यों किया जाता है रावण दहन? यहां समझें इस परंपरा के पीछे की मान्यता

Published: Tue, 20 Oct 2026 07:30 AM (IST)

दशहरा पर रावण दहन प्रदोष काल में ही क्यों किया जाता है, यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यता है। मान्यता है ...और पढ़ें

क्यों खास है प्रदोष काल? (Picture Credit: AI Generated)

क्यों खास है प्रदोष काल? (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. दशहरा पर रावण दहन प्रदोष काल में होता है।

  2. प्रदोष काल नकारात्मक शक्तियों को खत्म करता है।

  3. इस समय किए शुभ कार्य सफल होते हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर दशहरा मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 20 अक्टूबर को दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध करके माता सीता को मुक्त कराया था। इस अवसर पर देशभर में रावण दहन किया जाता है।
रावण दहन के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। दशहरा के दिन रावण दहन प्रदोष काल में करने का अधिक महत्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर प्रदोष काल में ही क्यों रावण का पुतला फूंका जाता है? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं इसके पीछे के रहस्य के बारे में।

क्यों खास है प्रदोष काल?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्यास्त के आसपास का समय प्रदोष काल कहलाता है। इसी मुहूर्त में रावण दहन करने का विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रदोष काल में शुरू किया गया शुभ काम हमेशा सफल होता है। दशहरा के दिन इसी मुहूर्त में रावण का पुतला जलाकर अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व मनाया जाता है। दिन और रात के मिलने के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। हिंदू धर्म में प्रदोष काल और गोधूलि बेला को नकारात्मक और आसुरी शक्तियों के प्रभाव को खत्म करने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना गया है।

नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को रोकना

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव काफी बढ़ जाता है। रात के अंधेरे में इन शक्तियों का प्रभाव और न बढ़े। इसलिए रावण का दहन प्रदोष काल में ही कर दिया जाता है, ताकि नकारात्मक ऊर्जा हावी न हो सके।

प्रदोष काल में जरूर करें ये काम

  • हिंदू धर्म में प्रदोष काल का विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना बेहद फलदायी माना जाता है।
  • प्रदोष काल में कच्चे दूध, गंगाजल, दही और शहद से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें।
  • शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें।
  • मंदिर में शिव प्रतिमा के सामने या घर के मंदिर में देसी घी का दीपक जलाएं।
  • रुद्राक्ष की माला से 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का सच्चे मन से जाप करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।