विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दशहरा 2026: रावण की ये 3 गलतियां बनीं उसके विनाश की वजह, हर इंसान को लेनी चाहिए सीख

Published: Mon, 19 Oct 2026 03:30 PM (IST)

दशहरा पर रावण दहन के साथ उसके जीवन से जुड़ी सीखों को समझना महत्वपूर्ण है। रावण के अहंकार, स्त्री अपमान ...और पढ़ें

किन गलतियों से हुआ रावण का अंत? (Picture Credit: AI Generated)

किन गलतियों से हुआ रावण का अंत? (Picture Credit: AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, देशभर में 20 अक्टूबर को दशहरे का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन रावण दहन करने का विधान है। हर साल दशहरा आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था।

यह पर्व संदेश देता है कि व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य और धर्म की ही होती है। रावण के जीवन से कई ऐसी महत्वपूर्ण सीखें मिलती हैं, जिन्हें हर व्यक्ति को समझना चाहिए। आइए जानते हैं कि रावण की किन गलतियों के कारण उसका अंत हुआ और उनसे क्या सीख मिलती है।

अहंकार

लंकापति रावण को वेदों और शास्त्रों का प्रकांड ज्ञान था, लेकिन इस ज्ञान ने उसमें अहंकार भर दिया। उसका मानना था कि समस्त ब्रह्मांड में उसे कोई पराजित नहीं कर सकता। इसी अहंकार के कारण उसने भगवान श्रीराम को एक साधारण मनुष्य समझने की भूल की, जो अंततः उसके विनाश का कारण बनी। इससे सीख मिलती है कि व्यक्ति को कभी भी अपने धन, ज्ञान या शक्ति का घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि अहंकार सदैव पतन की ओर ले जाता है।

स्त्री का अपमान

रावण के पतन की दूसरी सबसे बड़ी वजह माता सीता का हरण करना था। वनवास के दौरान उसने छल से माता सीता का हरण किया और उन्हें अशोक वाटिका में बंदी बनाकर रखा। उसकी यही धृष्टता उसके पूरे कुल और साम्राज्य के विनाश का कारण बनी। रावण के इस कृत्य से सीख मिलती है कि जीवन में कभी किसी स्त्री का अपमान नहीं करना चाहिए और न ही वासना या लोभ के वशीभूत होकर कोई अनुचित कार्य करना चाहिए।

निजी स्वार्थ

रावण के हठ और निजी स्वार्थ के कारण सोने की लंका तबाह हो गई और अनगिनत निर्दोष सैनिक मारे गए। भारी नुकसान के बावजूद उसके तानाशाही रवैये में कोई बदलाव नहीं आया। यदि रावण समय रहते युद्ध रोक देता, तो लंका और उसके सैनिकों की रक्षा हो सकती थी। इससे यह सीख मिलती है कि व्यक्ति को कभी भी अपने स्वार्थ और हठ को सर्वोपरि नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ऐसा स्वार्थ अपनों के विनाश का कारण बनता है।

यह भी पढ़ें- रावण के पास सब कुछ था, फिर भी हार गया! रामचरितमानस की यह चौपाई देती है बड़ी सीख

यह भी पढ़ें- 20 या 21 अक्टूबर, दशहरा कब है? नोट करें सही तारीख, रावण दहन का शुभ मुहूर्त और विजयदशमी का महत्व

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।