धनतेरस की कथा: एक भूल और 12 साल का श्राप! क्यों धन की देवी लक्ष्मी को गरीब किसान के घर काटने पड़े कई साल
देवी लक्ष्मी को भगवान विष्णु के श्राप के कारण एक गरीब किसान के घर 12 साल तक रहना पड़ा था। ...और पढ़ें

धनतेरस की पौराणिक कथा (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
देवी लक्ष्मी को विष्णु के श्राप से किसान के घर रहना पड़ा।
उनकी उपस्थिति से किसान के घर में धन-धान्य बढ़ा।
धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा की परंपरा यहीं से शुरू हुई।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हर साल धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को भगवान धन्वंतरि के अवतरण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा के साथ धन्वंतरि की पूजा भी की जाती है।
यह पर्व मुख्य रूप से दीवाली के दो दिन पहले पड़ता है और इस दिन नया सामान खरीदने की प्रथा है। मुख्य रूप से इस दिन सोने-चांदी और बर्तनों की खरीदारी की जाती है।
यही नहीं इस दिन 13 दीपक घर के अलग-अलग स्थानों पर जलाए जाते हैं। इससे माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इस पर्व से जुड़ी एक प्रचलित कथा है जो इस पर्व को लेकर लोगों के बीच में प्रचलित है और इस कथा के अनुसार माता लक्ष्मी ने 12 साल तक एक गरीब किसान के घर पर वास किया था। आइए आपको बताते हैं पूरी कथा के बारे में।
धनतेरस की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु धरती पर भ्रमण के लिए जा रहे थे और तभी माता लक्ष्मी ने भी उनके साथ चलने की इच्छा जताई। इस पर भगवान विष्णु ने कहा कि यदि अगर वो उनके कुछ नियमों का पालन करेंगी तभी उनके साथ जा सकती हैं। माता लक्ष्मी ने उनकी बात स्वीकार कर ली और दोनों धरती लोक पहुंच गए।
धरती पर पहुंचने के बाद एक स्थान पर भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी से कहा कि वो इस जगह पर ही उनकी प्रतीक्षा करें, उन्हें दक्षिण दिशा की ओर किसी काम के लिए जाना है। विष्णु जी ने यह भी कहा कि वो उनके पीछे न आएं। माता लक्ष्मी ने पहले तो उनकी बात मान ली, लेकिन कुछ देर बाद उनके मन में यह जानने की जिज्ञासा उठी कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या है, जहां जाने से भगवान विष्णु ने उन्हें मना किया है।
माता लक्ष्मी अपनी उत्सुकता को रोक नहीं पाईं और भगवान विष्णु के पीछे-पीछे दक्षिण दिशा की ओर चली गईं। रास्ते में उन्हें सरसों का एक लहलहाता खेत दिखाई दिया। पीले फूलों से सजे खेत देखकर माता लक्ष्मी मंत्रमुग्ध हो गईं और उन्हें अपना श्रृंगार करने की इच्छा जागृत हुई। माता लक्ष्मी ने सरसों के फूल तोड़े और उनसे अपना श्रृंगार करने लगीं। कुछ दूर आगे बढ़ने पर उन्हें गन्ने का खेतदिखा और वो गन्ने का रस चूसने लगीं।
जब विष्णु जी ने उन्हें एक गरीब किसान के खेत को नुकसान पहुंचाते हुए देखा तो वो नाराज हो गए और विष्णु जी ने कहा कि माता लक्ष्मी ने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया है। यही नहीं आपने एक किसान की मेहनत से कमाई हुई फसल को नुकसान भी पहुंचाया है। इस भूल का प्रायश्चित करने के लिए आपको इसी किसान के घर 12 वर्षों तक रहना होगा और उनकी सेवा करनी होगी। भगवान विष्णु के इसी श्राप की वजह से माता लक्ष्मी को किसान के घर में रहना पड़ा।
मां लक्ष्मी की कृपा से बदल गई किसान की किस्मत
माता लक्ष्मी के किसान के घर में निवास करने से उसके घर में समृद्धि आने लगी और माता लक्ष्मी ने किसान की पत्नी से कहा कि वो रोज सुबह स्नान करके पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा करे और इसके बाद ही रसोई का काम शुरू करे।
किसान की पत्नी ने माता लक्ष्मी की बात को पूरी श्रद्धा से मान लिया। वह नियमित रूप से स्नान करके देवी की पूजा करने लगी। माता लक्ष्मी की कृपा से किसान के घर में धन-धान्य बढ़ने लगा और उसकी गरीबी दूर हो गई।
किसान ने जब माता लक्ष्मी को घर में रुकने का किया आग्रह
12 साल पूरे होने के बाद भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को जब वापस लेने आए तब उसने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि माता लक्ष्मी को उसके घर से न ले जाएं।
तब भगवान विष्णु ने किसान को समझाया कि माता लक्ष्मी चंचला हैं। उन्हें कोई एक स्थान पर बांधकर नहीं रख सकता। वे अपने भक्तों पर कृपा बरसाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाती रहती हैं।
कब शुरू हुई धनतेरस पर माता लक्ष्मी की पूजा?
किसान जब अपनी जिद पर अड़ा रहा तब माता लक्ष्मी ने किसान से कहा कि कल कार्तिक की त्रयोदशी तिथि है, इस दिन घर को साफ़ करो और शाम के साम्य घी का दीपक जलाकर मेरी पूजा करो। ऐसा करने वाले के घर में हमेशा माता लक्ष्मी का वास होता है। इसी मान्यता से आज भी धनतेरस पर माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
अगर आप भी माता लक्ष्मी की कृपा चाहते हैं, तो धनतेरस के दिन इस कथा का पाठ करते हुए माता लक्ष्मी का पूजन अवश्य करें।
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