Dhanteras 2026: भगवान धन्वंतरि के हाथ में ही क्यों था अमृत कलश? समुद्र मंथन की इस कथा में छिपा है गहरा रहस्य
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश के साथ प्रकट होने का रहस्य समुद्र मंथन से जुड़ा है। देवताओं की ...और पढ़ें

धनतेरस पर क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा? (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में धनतेरस (Dhanteras 2026) के पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना जाता है। इसी दिन से 5 दिवसीय महापर्व की शुरुआत होती है। इस अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से शुभ परिणाम मिलते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार धनतेरस 6 नवंबर को है।
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे और इसीलिए धनतेरस के दिन उनकी पूजा-अर्चना होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट क्यों हुए थे? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में आपको इसके पीछे की वजह के बारे में विस्तार से बताते हैं।
अमृत कलश लेकर क्यों प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अमृत की प्राप्ति और देवताओं की खोई हुई शक्ति व वैभव को वापस पाने के लिए समुद्र मंथन हुआ था। जब देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उसमें से 14 रत्नों की प्राप्ति हुई। साथ ही, समुद्र मंथन के समय कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को अमृत का कलश लेकर भगवान धन्वन्तरि अवतरित हुए थे। इसलिए इस दिन को भगवान धन्वन्तरि के प्रकटोत्सव धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।
भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार और देवताओं का वैद्य माना जाता है। जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे, तो उनके हाथों में अमृत कलश था। यह अमृत देवताओं को अमर, निरोगी और शक्तिशाली बनाने के लिए था, जिससे वे असुरों से अपना राजपाट वापस ले सकें। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी वजह से उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का जनक कहा जाता है। भगवान धन्वंतरि के समुद्र मंथन से प्रकट होने की कथा का वर्णन विष्णु पुराण और अग्नि पुराण में मिलता है।
क्यों होती है पूजा?
धनतेरस के दिन भगवान धन्वन्तरि प्रकट हुए थे। इसलिए इस खास अवसर पर इनकी पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर विधिपूर्वक साधना करने से भगवान धन्वन्तरि सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं और जीवन में कोई कमी नहीं होती।
धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान धन्वन्तरि की पूजा करने का विधान इसलिए भी है, ताकि परिवार को धन लाभ के साथ-साथ स्वास्थ्य और लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
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