Dhanteras 2026: यमराज को खुश करने से लेकर तिजोरी भरने तक: धनतेरस पर पुराने सिक्के और नए दीपक क्यों हैं सबसे अहम?
हिंदू धर्म में धनतेरस (Dhanteras 2026) पर पुराने सिक्कों की पूजा और नए दीपक खरीदने की परंपरा का विशेष महत्व ...और पढ़ें

धनतेरस पर पुराने सिक्कों की पूजा और नए दीये खरीदने की परंपरा (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में धनतेरस जिसे 'धनत्रयोदशी' के नाम से भी जाना जाता है, इसका वर्णन हिंदू पौराणिक ग्रंथों में देखने को मिलता है। हिंदू पंचांग के आधार पर कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की 13 तारीख को मनाया जाता है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार के दिन पड़ रही है।
धनतेरस (Dhanteras 2026) के मौके पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई के साथ-साथ सोना-चांदी, नए बर्तन और नई चीजों को खरीदते हैं। इन चीजों के अलावा धनतेरस के मौके पर पुराने सिक्कों की पूजा और दीपक खरीदने की भी परंपरा निभाई जाती है।
धनतेरस पर पुराने सिक्कों की पूजा का महत्व
धनतेरस पर कई हिंदू घरों में पुराने चांदी और सोने के सिक्के जिन पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की छवि होती है, उसकी पूजा करता है।
माना जाता है कि घर में रखें पुराने सिक्के इस बात का प्रतीक माने जाते हैं कि परिवार में पीढ़ियों से पैसा और समृद्धि स्थिर है। धनतेरस पर पुराने सिक्के की पूजा करने से न सिर्फ मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है, बल्कि सुख-समृद्धि का भी वास होता है।
पुराने सिक्के परिवार की पुरानी धरोहर का भी प्रतीक होती है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को आशीर्वाद के तौर पर दी जाती है। इनकी पूजा करना पूर्वजों का आभार भी माना जाता है।
माना जाता है कि धनतेरस पर माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा करने के लिए पुराने सिक्कों का भी इस्तेमाल करना चाहिए।
पूजा होने के बाद इन पुराने सिक्कों को अच्छे से साफ करके एक पोटली में बांधकर फिर से पूरे साल के लिए घर की तिजोरी में रख देना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में साल भर धन का प्रवाह बना रहता है।
धनतेरस पर नए दीपक खरीदने की परंपरा
धनतेरस के मौके पर नए दीये खरीदने की परंपरा के पीछे यम दीपदान और माता लक्ष्मी व भगवान धनवंतरी का आशीर्वाद प्राप्त करना है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनतेरस पर नए दीपक जो मिट्टी से निर्मित हो खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन दीयों को जलाने से नकारात्मकता दूर होने के साथ घर में शुभता आती है जो परिवार की खुशियों को सुरक्षित रखने का काम करती है।
धनतेरस के दिन शाम के समय यम दीपदान यानी यमराज के नाम से एक दीया जलाया जाता है, जिसे घर की दक्षिण दिशा में रखा जाता है। ऐसा करने के पीछे लोगों का मानना है कि, धनतेरस पर यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का डर नहीं सताता है और तो और परिवार की स्वास्थ्य भी बेहतर भी होती है।
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