छठ 2026 पर बन रहा दुर्लभ महासंयोग, कुंडली में कमजोर सूर्य वाले जरूर करें ये उपाय!
इस साल छठ महापर्व पर एक विशेष संयोग बन रहा है, जब संध्या अर्घ्य रविवार को दिया जाएगा, जो सूर्य ...और पढ़ें

छठ पूजा 2026 पर महासंयोग
HighLights
छठ महापर्व पर बन रहा है विशेष ज्योतिषीय संयोग।
संध्या अर्घ्य रविवार को, सूर्य देव को समर्पित दिन।
कमजोर सूर्य वाले जातकों के लिए अत्यंत शुभ।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर भारत खासकर बिहार का महापर्व छठ (Chhath Puja 2026) आने में अब कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। हालांकि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में छठ को लेकर घट बनने शुरू हो चुके हैं। हिंदू धर्म से जुड़े लोगों के लिए छठ आस्था और विश्वास का पर्व है। इस पर्व के दौरान विधि-विधान से सूर्य भगवान की पूजा अर्चना की जाती है।
इस साल छठ के मौके पर एक खास संयोग बनने जा रहा है, जो ज्योतिषीय नजरिए से बेहद खास माना जा रहा है। यह संयोग उन लोगों के लिए बेहद खास रहने वाला जिनकी कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति बेहद कमजोर है या सूर्य दोष से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
इस साल छठ पर क्या संयोग बन रहा है?
इस साल छठ महापर्व की शुरुआत 13 नवंबर 2026, शुक्रवार को नहाय-खाए के साथ हो रही है। इसके अगले दिन यानी 14 नवंबर 2026 को खरना है। वहीं 15 नवंबर 2026 को सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा और 16 नवंबर सोमवार को सूर्य देवता को सुबह का अर्घ्य दिया जाना है।
इस साल खास बात यह है कि सूर्य भगवान को संध्या अर्घ्य रविवार के दिन दिया जाना है। ज्योतिष शास्त्र में रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। ऐसे में रविवार को सूर्य अस्त होने के समय सूर्यदेव की उपासना और अर्घ्य देने का खास महत्व बताया गया है। जो इस वर्ष छठ पूजा (Chhath Mahaparv 2026) में संयोग बन रहा है।

इस साल छठ पर सूर्य को कैसे मजबूत करें?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जिन भी जातकों की कुंडली में सूर्य की स्थिति बेहद कमजोर स्थिति में है या फिर सूर्य दोष की समस्या हैं, उन्हें इस साल छठ के अवसर पर खासतौर से सूर्यदेव की उपासना करनी चाहिए। माना जाता है कि कमजोर सूर्य होने पर व्यक्ति को आत्मविश्वास में कमी महसूस होने के साथ मानसिक तनाव, समाज में मान-सम्मान में कमी और जीवन में लगातार समस्याएं बनी रहती हैं।
इसके अलावा सूर्य दोष से संबंधित लोगों को सेहत से जुड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस साल छठ पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा और नियम के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।
छठ महापर्व में खासतौर पर सूर्य देव के साथ-साथ छठी मैया की पूजा और उपासना की जाती है। इस व्रत को रखने वाली महिलाएं कठिन नियमों का पालन करते हुए लगातार चार दिनों तक छठी मैया और सूर्य देव की पूजा करती हैं।
नहाय-खाय से शुरू होने वाली इस व्रत की परंपरा खरना, संध्या अर्घ्य और सुबह होने वाली अर्घ्य के साथ दी जाती है। इस वजह से छठ में सिर्फ एक दिन ही नहीं, बल्कि चारों दिन का अपना खास आध्यात्मिक महत्व होता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
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