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छठ पूजा कब है? नहाय-खाय के साथ शुरू होगा 4 दिन का अनुष्ठान, ज्योतिषाचार्य ने बताया शुभ मुहूर्त और पूजा विधि 

Published: Sun, 01 Nov 2026 01:56 PM (IST)

लोक आस्था का महापर्व Chhath 2026 में नहाय-खाय, खरना, अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने जैसे अनुष्ठान शामिल हैं। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. छठ महापर्व 13 नवंबर से 16 नवंबर तक चलेगा।

  2. नहाय-खाय, खरना, अर्घ्य प्रमुख अनुष्ठान हैं।

  3. यह पर्व प्रकृति और स्वस्थ जीवन का संदेश देता है।

जागरण संवाददाता, पटना। लोक आस्था, शुद्धता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का महापर्व छठ इस वर्ष 13 नवंबर से शुरू होगा। चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय से होगी।

14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य और 16 नवंबर सोमवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ महापर्व का समापन होगा। इस बार रविवार और षष्ठी तिथि का विशेष संयोग भी बन रहा है।

ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश झा के अनुसार, छठ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, शारीरिक शुद्धता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का भी संदेश देता है।

सूर्योपासना के इस महापर्व में शुद्धता, संयम, उपवास और मौसमी फलों के सेवन की परंपरा जीवनशैली को प्रकृति के अनुकूल बनाने की प्रेरणा देती है।

रवियोग में नहाय-खाय से शुरुआत

13 नवंबर शुक्रवार को मूल नक्षत्र, धृति योग और रवियोग के संयोग में नहाय-खाय होगा। इस दिन व्रती गंगा नदी, जलाशय या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करेंगी और भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर व्रत की निर्विघ्न पूर्णता की कामना करेंगी।

इसके बाद पूरी पवित्रता से तैयार अरवा चावल, चना दाल, कद्दू की सब्जी, आंवले की चासनी और पकौड़ी आदि ग्रहण कर अनुष्ठान शुरू करेंगी। वहीं, 14 नवंबर शनिवार को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और रवियोग में खरना का अनुष्ठान होगा।

व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को भगवान सूर्य की पूजा करेंगी और गुड़ से बनी खीर सहित पारंपरिक प्रसाद ग्रहण करेंगी। खरना के प्रसाद के बाद 36 घंटे के निर्जला व्रत का संकल्प पूरा किया जाएगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग में पहला अर्घ्य

15 नवंबर रविवार को कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग में पहला अर्घ्य दिया जाएगा। व्रती फल, मिष्ठान्न, नारियल, पान-सुपारी, फूल और माला से डाला सजाकर छठ घाट पहुंचेंगी। शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और आरोग्यता की कामना करेंगी।

16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य

16 नवंबर सोमवार को कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर वृद्धि योग और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग में महापर्व का समापन होगा। व्रती अहले सुबह गंगा घाटों और कृत्रिम जलाशयों में पहुंचकर उदीयमान सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य देंगी।

इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास पूरा होगा। व्रती पारण कर प्रसाद वितरित करेंगी और परिवार व श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगी। छठ की परंपराओं में स्वास्थ्य और प्रकृति से जुड़ाव के कई पहलू समाहित हैं।

इस मौसम में सर्दी, जुकाम और कफ जैसी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। छठ के प्रसाद में गुड़, ईख, गागर और अन्य मौसमी फलों का विशेष महत्व है।

खरना में चीनी के स्थान पर गुड़ का प्रयोग पारंपरिक खानपान का हिस्सा है। सूर्य की उपासना, स्वच्छता, सात्विक भोजन और उपवास के माध्यम से यह पर्व अनुशासित जीवनशैली अपनाने का संदेश देता है।

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