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चाणक्य नीति: बच्चों के सामने माता-पिता भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, बिगड़ सकती है परवरिश

Published: Sun, 27 Sep 2026 06:30 PM (IST)

आचार्य चाणक्य के अनुसार, बच्चों के चरित्र और भविष्य निर्माण में माता-पिता का व्यवहार बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। पेरेंट्स को बच्चों के सामने कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए।

चाणक्य नीति: बच्चों की परवरिश में माता-पिता न करें ये 4 गलतियां (Picture Credit: AI Generated)

चाणक्य नीति: बच्चों की परवरिश में माता-पिता न करें ये 4 गलतियां (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. बच्चों के सामने झूठ बोलने से हमेशा बचें।

  2. आपसी बातचीत में सम्मान और मर्यादा बनाए रखें।

  3. बच्चों की गलतियों को नजरअंदाज न करें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। बच्चे के चरित्र, आत्मविश्वास और भविष्य के निर्माण में माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान होता है। आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों में बताते हैं कि बच्चे का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पेरेंट्स उसके सामने कैसा व्यवहार कर रहे हैं।

बच्चे कच्ची मिट्टी के घड़े के समान होते हैं और उन्हें जिस आकार में ढाला जाए उसी में ढल जाते हैं। आचार्य चाणक्य ने बच्चों की परवरिश को लेकर ऐसी बातें बताई हैं जो आज भी पेरेंटिंग में बहुत काम आती हैं।

यही नहीं ऐसी कई गलतियां भी हैं जिनसे बच्चे आगे चलकर अपने संस्कारों को भूल जाते हैं और इसके जिम्मेदार उसके माता-पिता ही होते हैं। आइए आपको बताते हैं कि अच्छे पेरेंट्स को बच्चे के सामने कौन से काम करने से बचना चाहिए।

बच्चों के सामने झूठ बोलने से बचना चाहिए

आचार्य चाणक्य बताते हैं कि माता-पिता को भूलकर भी बच्चों के सामने झूठ नहीं बोलना चाहिए। अगर माता-पिता ही झूठ बोलते हैं, तो बच्चा भी उनसे यही सीखता है।

ऐसे में बच्चे के मन मस्तिष्क में गलत असर होता है और वो बात-बात पर बातें छिपाना या झूठ बोलना सीख जाता है। बच्चे को हमेशा ऐसा सिखाएं कि झूठ बोलना किसी के जीवन का सबसे बड़ा पाप हो सकता है और मजाक में भी झूठ नहीं बोलना चाहिए।

आपसी बात-चीत में सम्मान बनाए रखना

माता-पिता कई बार आपस में बात-चीत करते समय एक-दूसरे से ऊंची आवाज में बात करने लगते हैं या फिर गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। यही नहीं कई बार एक-दूसरे को नीचे दिखाने के लिए उनकी कमियों को भी उजागर करते हैं। ऐसे में बच्चे के मन-मस्तिष्क में भी बुरा असर हो सकता है और वो दूसरों का सम्मान करने के बजाय सबसे गलत भाषा में बात करना सीख जाता है।

बच्चों को जरूरत से ज्यादा प्यार करना

माता-पिता को कभी भी बच्चे की जरूरत से ज्यादा प्यार नहीं देना चाहिए। चाणक्य नीति का एक प्रसिद्ध श्लोक है ' लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः। तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत् ॥
इसका अर्थ है कि बच्चों को अत्यधिक प्यार देने से उनके भीतर कई बुरी आदतें आ सकती हैं। उन्हें अनुशासन में रखना जरूरी है जिससे उनके भीतर के संस्कारों का निर्माण होता है।

बच्चों की गलतियों को नजरअंदाज करना

कई बार माता-पिता बच्चे को इतना ज्यादा प्यार करते हैं कि उनकी गलतियों तक को नजरअंदाज करने लगते हैं। ऐसे में बच्चे बड़ी से बड़ी गलती करने से भी घबराते नहीं हैं।

आपको चाहिए कि बच्चों को 5 साल तक की उम्र तक लाड-प्यार करें, लेकिन उसके बाद उनकी किसी भी गलती को नजरंदाज करने के बजाय उन्हें सही-गलत का ज्ञान कराना जरूरी है। वहीं जैसे ही बच्चा किशोरावस्था में आ जाए उसके साथ मित्रवत व्यवहार करें, जिससे वो बातों को छिपाने के बजाय आपके सामने रखे और किसी भी गलत रास्ते पर न जाए।

अगर आप भी इनमें से कोई गलती करते हैं, तो आज ही अपनी इन आदतों को बदलें जिससे बच्चे को अच्छी परवरिश मिले।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।