विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Bhagavad Gita Shlokas: रिश्तों की असल पहचान कराते हैं गीता के ये 5 श्लोक, जान लेंगे तो नहीं खाएंगे धोखा

Published: Thu, 15 Oct 2026 07:30 AM (IST)

जीवन में सच्चे और दिखावटी रिश्तों की पहचान करना बहुत जरूरी है। श्रीमद्भगवद्गीता के 5 खास श्लोकों में भगवान कृष्ण ...और पढ़ें

रिश्तों की गहराई को समझें और धोखे से बचें ।

 रिश्तों की गहराई को समझें और धोखे से बचें ।

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जीवन में रिश्तों का बहुत महत्व होता है। कुछ लोग हमारे सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं, तो कुछ लोग केवल अपने मतलब के लिए हमारे करीब आते हैं। ऐसे में सच्चे और दिखावटी रिश्तों के बीच अंतर समझना जरूरी है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म, मोह, अहंकार और प्रेम से जुड़ी ऐसी शिक्षाएं दी हैं, जो हमें रिश्तों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती हैं। आइए जानते हैं गीता के 5 श्लोक और उनसे मिलने वाली रिश्तों की सीख।

जो बिना किसी स्वार्थ के निभाएं रिश्ते

श्लोक:

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ 

अर्थ:

गीता के अध्‍याय 2 के श्‍लोक 47 का अर्थ यही है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं। इसलिए कर्म के फल को ही अपना उद्देश्य न बनाएं और आगे बढ़ें। मनुष्‍य योनी कर्म योनी होती है, इसलिए अपना कर्म करने से कभी पीछे न हटें।

सीख:

इस श्लोक से हमें सीख मिलती है कि रिश्तों में हर काम के बदले कुछ पाने की उम्मीद न रखें। सच्चे रिश्ते स्वार्थ और लेन-देन पर नहीं, बल्कि प्रेम और जिम्मेदारी पर टिके होते हैं। जो व्यक्ति केवल अपने फायदे के लिए आपका साथ देता है, उसके व्यवहार को समझें और उससे दूर हो जाएं।

जरूरत से ज्यादा मोह बन सकता है दुख का कारण

श्लोक:

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।

सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

अर्थ: भगवद्गीता गीता के अध्‍याय 2 के श्‍लोक 62 का अर्थ है कि किसी विषय के बारे में बार-बार सोचने से उसमें आसक्ति पैदा होती है। आसक्ति से इच्छा और इच्छा में बाधा आने पर क्रोध उत्पन्न होता है।

सीख:

जब हम किसी रिश्ते से बहुत ज्यादा उम्मीदें जोड़ लेते हैं, तो छोटी-छोटी बातें भी हमें दुख पहुंचाने लगती हैं। सामने वाला हमारी हर इच्छा पूरी करे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए रिश्तों में प्रेम रखें, लेकिन अपनी खुशी को पूरी तरह दूसरे व्यक्ति के व्यवहार पर निर्भर न बनाएं।

अहंकार रिश्तों में बढ़ाता है दूरियां

श्लोक:

अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिताः।

मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयकाः॥ 

अर्थ:

गीता के अध्‍याय 16 के श्‍लोक 18 का अर्थ है कि अहंकार, शक्ति के घमंड, कामना और क्रोध में डूबे लोग दूसरों के प्रति द्वेष का भाव रखते हैं।

सीख:

इस श्‍लोक से हमें सीख मिलती हे कि दिखावटी रिश्तों में कई बार अपनी बात को सही साबित करने और दूसरों से बेहतर दिखने की कोशिश होती है। ऐसे में प्रेम और सम्मान पीछे छूट जाते हैं। सच्चे रिश्ते वही होते हैं, जहां दोनों लोग एक-दूसरे की भावनाओं को समझते हैं और अपनी गलती स्वीकार करने से पीछे नहीं हटते।

सच्चे रिश्तों में होती है करुणा और अपनापन

श्लोक:

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।

निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥

अर्थ:

गीता के अध्‍याय 12 के श्‍लोक 13 का अर्थ है, जो किसी से द्वेष नहीं करता, सबके प्रति मित्रता और करुणा रखता है, अहंकार से दूर रहता है तथा सुख-दुख में समान भाव रखता है, वह भगवान को प्रिय होता है।

सीख:

इस श्‍लोक से सीख मिलती है कि सच्चा रिश्ता केवल मीठी बातें करने से नहीं बनता। उसमें दूसरों के प्रति सम्मान, दया और समझ भी जरूरी है। जो व्यक्ति आपकी परेशानियों को समझता है और कठिन समय में आपका साथ देता है, उसका व्यवहार उसके सच्चे अपनेपन को दिखाता है।

मन को शांत रखकर समझें रिश्तों की सच्चाई

श्लोक:

समः शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयोः।

शीतोष्णसुखदुःखेषु समः सङ्गविवर्जितः॥ 

अर्थ:

गीता के अध्‍याय 12 के श्‍लोक 18 का अर्थ है कि, जो शत्रु और मित्र, मान और अपमान तथा सुख और दुख में समान भाव रखता है और आसक्ति से दूर रहता है, वह सबको एक जैसा समझने वाला व्यक्ति है।

सीख:

हर व्यक्ति से एक जैसा व्यवहार मिलने की उम्मीद करना सही नहीं है। किसी के बदलते व्यवहार से तुरंत परेशान होने के बजाय उसके काम और व्यवहार को समय के साथ समझें। गीता की यह सीख हमें भावनाओं में बहकर निर्णय लेने के बजाय शांत मन से रिश्तों को परखने की प्रेरणा देती है।

अत: अगर आप रोजाना भगवद्गीता के इन 5 श्‍लोकों का पाठ करते हैं, तो निश्‍चित तौर पर आपके अंदर रिश्‍तों में दूध का दूध और पानी का पानी करने की शक्ति आ जाएगी। आप वक्‍त रहते समझ पाएंगे कि किस तरह का रिश्‍ता आपके जीवन के लिए बेहतर है।

यह भी पढ़ें- गीता के ये 2 श्लोक बदल देंगे जीवन को देखने का नजरिया, कठिन समय में मन शांत करने का यह है अचूक महामंत्र

यह भी पढ़ें- न जीत का घमंड, न हार का गम! श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक सिखाता है जीवन का असली मंत्र

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।