अनंत चतुर्दशी 2026 के दिन कलाई पर अनंत सूत्र क्यों बांधा जाता है? ज्योतिषाचार्य ने बताया 14 गांठों का रहस्य
ज्योतिषी रजनी गुप्ता से जानिए अनंत चतुर्दशी के दिन 14 गांठों का रहस्य क्या है और भगवान विष्णु के 14 रूप के साथ-साथ धागा बांधने के सही नियम।

अनंत सूत्र बांधने के सही नियम (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी (Anant Chatrudashi 2026) का पावन पर्व बेहद खास माना जाता है। यह दिन पूरी तरह से सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। इसलिए, इस दिन भगवान विष्णु जी की पूरे विधि-विधान से पूजा करने का नियम है। ऐसी मान्यता है कि श्रीहरि की कृपा से इंसान के जीवन की सभी बाधाएं और कष्ट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं।
इस दिन पूजा के बाद कलाई पर एक खास धागा बांधा जाता है जिसे 'अनंत सूत्र' कहते हैं। इस सूत्र में 14 गांठे लगी होती हैं। आइए इस आर्टिकल में एस्ट्रोपत्री की जानी-मानी ज्योतिषी रजनी गुप्ता जी से जानते हैं कि आखिर इन 14 गांठों का रहस्य क्या है।
अनंत सूत्र की 14 गांठों में छिपा है ब्रह्मांड का रहस्य
पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, हमारे विशाल ब्रह्मांड में कुल 14 लोक मौजूद हैं। इन लोकों को दो हिस्सों में बांटा गया है- सात ऊर्ध्व लोक (ऊपर के लोक) और सात पाताल लोक (नीचे के लोक)। सात ऊर्ध्व लोकों के नाम हैं- भूलोक, भुवलोक, स्वलोक, महलोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक।
वहीं, सात पाताल लोकों के नाम हैं- अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। अनंत सूत्र में लगाई गई हर एक गांठ ब्रह्मांड के इन्हीं 14 लोकों का प्रतिनिधित्व करती है।
भगवान विष्णु के 14 अवतारों का प्रतीक
इन लोकों के अलावा, अनंत सूत्र का संबंध श्रीहरि के रूपों से माना गया है। मान्यता है कि इस पूरे संसार और ब्रह्मांड की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने चौदह अलग-अलग रूप धारण किए थे। यह पवित्र अनंत सूत्र हमें विष्णु जी की सर्वव्यापकता यानी उनके कण-कण में मौजूद होने का अहसास कराना है।
अनंत चतुर्दशी का अन्य धार्मिक महत्व
गणेश विसर्जन का दिन: यह पावन दिन 10 दिनों तक चलने वाले भव्य गणेशोत्सव (Ganeshotsav 2026) के समापन का भी होता है। इसी दिन भक्त नम आंखों से अपने गणपति बप्पा का विसर्जन करते हैं।
जैन धर्म में खास अहमियत: जैन धर्म में भी इस दिन का बहुत महत्व है। इस दिन जैन धर्म के अनुयायी अपने 'दशलक्षण पर्व' का समापन करते हैं और 'क्षमावाणी पर्व' मनाते हैं। इस दिन सभी लोग गिले-शिकवे मिटाकर एक-दूसरे से अपनी गलतियों के लिए सच्चे मन से क्षमा मांगते हैं।
सूत्र बांधने के जरूरी नियम
इस पवित्र धागे को धारण करने के नियम बहुत साफ हैं। महिलाएं यह पवित्र अनंत सूत्र हमेशा अपने बाएं हाथ में बांधती हैं, जबकि पुरुष इसे अपने दाहिने हाथ की कलाई पर बांधते हैं। 14 गांठों वाला यह चमत्कारी धागा एक रक्षा कवच की तरह काम करता है और व्यक्ति की हर तरह के संकटों से रक्षा करता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
