सारे कष्ट साथ ले जाएंगे विघ्नहर्ता, अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन से पहले ऐसे करें बप्पा की विदाई पूजा
अनंत चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, यह दिन गणपति बप्पा को समर्पित है और इसी दिन उनका ...और पढ़ें
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कैसे करें गणपति विसर्जन? (AI-generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi 2026) का विशेष महत्व है। यह दिन गणपति बप्पा को समर्पित है। अभी देशभर में गणेश उत्सव की धूम है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति जी का विसर्जन (Ganesh Visarjan) किया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विसर्जन करने से पहले बप्पा की पूजा-अर्चना करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और कामों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। अगर आपने भी अपने घर में गणपति बप्पा को विराजमान किया है, तो अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करने से पहले गणेश जी की विशेष पूजा जरूर करें।
इस आर्टिकल में दी गई पूजा विधि से भगवान गणेश प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं, जिससे भक्तों को जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं।
विसर्जन से पहले पूजा की विधि
- अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करने से पहले साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क कर उसे शुद्ध करें।
- भगवान गणेश की पूजा करने से पहले घी का दीपक जलाएं ।
- बप्पा को कुमकुम, अक्षत, हल्दी और चंदन का तिलक लगाएं।
- दूर्वा की 21 गांठें चढ़ाएं।
- गणेश विसर्जन के लिए लाल या पीले कपड़े में नारियल, गुड़, चावल, मोदक और कुछ सिक्के बांधकर मूर्ति के पास रख दें।
- इसके बाद विधिपूर्वक आरती करें।
- गणेश चालीसा का पाठ करें और मंत्रों का जप करें।
- प्रभु से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगें।
- बप्पा के जयकारों के साथ गणेश विसर्जन करें।
अनंत चतुर्दशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Anant Chaturdashi 2026 Date and Shubh Muhurat)
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत- 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का समापन- 25 सितंबर को रात 11 बजकर 08 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी है। इसी दिन गणेश विसर्जन किया जाएगा।
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से 11 बजकर 06 मिनट तक।
गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- सुबह 06 बजकर 21 मिनट से 10 बजकर 52 मिनट तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ)- दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से 01 बजकर 53 मिनट तक
सायं मुहूर्त (चर)- शाम 04 बजकर 54 मिनट से 06 बजकर 25 मिनट तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ)- रात 09 बजकर 24 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- रात 12 बजकर 23 मिनट से 04 बजकर 52 मिनट तक (26 सितंबर)
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
