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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आत्मा को प्रकट न होने देना आत्महत्या है : आचार्य प्रशांत

By Vineet SharanEdited By:
Published: Sun, 20 Jun 2021 03:51 PM (IST)

आचार्य प्रशांत कहते हैं कि इसको भ्रूण हत्या नहीं कहेंगे आप? अजन्मे शिशु की गर्भ में हत्या की जाए तो ...और पढ़ें

वेदांत मर्मज्ञ आचार्य प्रशांत कहते हैं कि फ़ूल खिलकर झड़ जाए - कोई बात नहीं, सुन्दर घटना है।
वेदांत मर्मज्ञ आचार्य प्रशांत कहते हैं कि फ़ूल खिलकर झड़ जाए - कोई बात नहीं, सुन्दर घटना है।

नई दिल्ली, जेएनएन। लेखक और वेदांत मर्मज्ञ आचार्य प्रशांत कहते हैं कि फ़ूल खिलकर झड़ जाए - कोई बात नहीं, सुन्दर घटना है। पर कली को ही मसल दिया जाए तो? और उसमें कली का ही सहयोग हो, कली की हामी हो तो? कि "हाँ, मसल दो मुझे"। उसे पता है अच्छे से कि जैसा जीवन वह जी रही है, जो कदम वह उठा रही है, उसमें मसल दी जाएगी, पर फिर भी वह कदम उठाए तो?

आचार्य प्रशांत कहते हैं कि इसको भ्रूण हत्या नहीं कहेंगे आप? किसी अजन्मे शिशु की गर्भ में हत्या की जाए तो उसे बुरा मानते हैं, पाप कहते हैं, अपराध कहते हैं, और जो हम अपनी ही हत्या करे हुए हैं, उसको क्या कहेंगे? आचार्य के मुताबिक आत्मा को प्रकट न होने देना ही असली आत्महत्या है। आप जो हैं, आत्मा, उसको अभिव्यक्त न होने देना ही तो आत्महत्या है। तो हम सब नहीं हुए आत्महत्या के अपराधी? यह नहीं कहलाएगी 'सुसाइडल लाइफ'?

आचार्य प्रशांत कहते हैं , आपको पक्का है, पूर्ण विश्वास कि जैसे आप हैं, ऐसा ही होने को पैदा हुए थे? यही नियति है आपकी? भरोसा है? सही में लगता है? जब आप पाँच के थे या पंद्रह के थे या पच्चीस के थे, तब इसी रूप में देखा था अपने आप को कि ऐसे हो जाएंगे? होगा तुम्हारे पास बहुत कुछ, जीवन तो भिखारियों सा ही बीता न। होगी बहुत सम्पदा, जिए तो चीथड़ों में ही न। मत बताओ कि तुम में पोटेंशियल कितना है, तुम्हारी सम्भावना से कुछ नहीं होता; दिखाओ कि जीवन कैसा है। यह मत बताओ कि तुम क्या कर सकते थे, तुम में कितना दम है। यह बताओ कि कर क्या रहे हो, जी कैसे रहे हो!