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    मां कात्यायनी का शक्तिपीठ है छतरपुर मंदिर

    By Edited By:
    Updated: Sat, 20 Oct 2012 07:42 AM (IST)

    छतरपुर मंदिर के नाम से विख्यात मां कात्यायनी मंदिर शक्तिपीठ में एक है। माना जाता है कि यह शक्तिपीठ वर्षो से विद्यमान है। पहले इस जगह पर जंगल-झाडि़यां हुआ करती थीं।

    नई दिल्ली। छतरपुर मंदिर के नाम से विख्यात मां कात्यायनी मंदिर शक्तिपीठ में एक है। माना जाता है कि यह शक्तिपीठ वर्षो से विद्यमान है। पहले इस जगह पर जंगल-झाडि़यां हुआ करती थीं। कहा जाता है कि बाबा संत नागपाल का जन्म कर्नाटक में हुआ। बाल्यावस्था में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया। एक महिला ने उन्हें देवी मां के मंदिर ले गई। इस वजह से उन्होंने मां दुर्गा को अपनी वास्तविक मां मान लिया। इसके बाद छतरपुर गांव के निकट दुर्गा आश्रम पधारे। करीब 1974 में उन्होंने इसका जीर्णोद्वार किया।

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    मंदिर की विशेषता-

    इस मंदिर का परिसर करीब 70 एकड़ जमीन में है। वास्तुकला की दृष्टि से मां कात्यायनी का यह मंदिर दिल्ली के किसी भी देवी मंदिर के तुलना में ज्यादा आकर्षक है। मंदिर में मां दुर्गा की अलग-अलग तीन बड़ी मूर्तियां हैं। जो अष्टधातु से बनी हैं।

    मुख्य मंदिर में पहले भूतल पर शिव मंदिर है। सीढि़यों से ऊपर चढ़ने पर पहले राम दरबार, कृष्ण राधा, कृष्ण व बलराम को लिए माता यशोदा की मृर्ति है। इसके अगले चरण में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। जहां नवरात्र में करीब एक लाख लोग रोज माता का दर्शन करते हैं।

    यह मंदिर इस तरह बनाया गया है कि एक से दूसरे मंदिर में जाने के लिए बाहर नहीं निकलना पड़ता। इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण महिषासुर मर्दनी हॉल है। जिसमें एक झूला स्थापित है। जिस पर चरण पादुका रखी है। इसके अलावा मां दुर्गा की विहंगम मूर्ति स्थापित है। जिन्हें महिषासुर का वध करते हुए दिखाया गया है। इसलिए महिषासुरमर्दनी नाम दिया गया।

    साथ में गणेश, लक्ष्मी, कार्तिक व मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित है। आम दिनों में इस हॉल में सिर्फ मां दुर्गा की प्रतिमा का कपाट खुलता है। नवरात्र व पुर्णिमा के दिन ही इस हॉल का पूरा कपाट खुलता है। इसके साथ में माता का बैठक कक्ष व शयन कक्ष है।

    मंदिर में माता की अष्टभुजी मूर्ति भी स्थापित है। बाबा नागपाल का वह यज्ञशाला आज भी विद्यमान है जिसमें नवरात्र में नित्य हवन होता है। मंदिर के दूसरे हिस्से में 101 फुट ऊंची भगवान हनुमान की मूर्ति व कच्छप के ऊपर बने श्रीयंत्र पर स्थित 60 फुट ऊंचा त्रिशुल श्रद्धा का केंद्र है।

    61 ब्राह्मण करते हैं दुर्गा पाठ-

    मंदिर में दस दिन यज्ञ होता है। 61 ब्राह्मण दुर्गा पाठ करते हैं। नवरात्र में हर रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। यहां आने वाला हर व्यक्ति भंडारे में प्रसाद जरूर ग्रहण करता है।

    मेट्रो की सुविधा उपलब्ध -

    माता के दर्शन के जाने के लिए बस के साथ-साथ आसानी से मेट्रो सुविधा भी उपलब्ध है। जो छतरपुर मेट्रो स्टेशन उतरकर आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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