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    Chinnamasta Jayanti 2023: छिन्नमस्ता जयंती है कब? जानें, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं महत्व

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Thu, 27 Apr 2023 03:26 PM (IST)

    Chinnamasta Jayanti 2023 धार्मिक मान्यता है कि मां की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं तत्काल पूर्ण होती हैं। इसके लिए साधक श्रद्धा भाव से मां छिन्नमस्ता की पूजा जप एवं तप करते हैं। आइए छिन्नमस्ता जयंती की तिथि शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानते हैं-

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    Chinnamasta Jayanti 2023: छिन्नमस्ता जयंती है कब? जानें, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं महत्व

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क | Chinnamasta Jayanti 2023: हिंदी पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह की चतुर्दशी तिथि को छिन्नमस्ता जयंती मनाई जाती है। इस प्रकार साल 2023 में 4 मई को छिन्नमस्ता जयंती मनाई जाएगी। साथ ही गुप्त नवरात्रि के दौरान भी मां छिन्नमस्ता की पूजा उपासना का विधान है। अत: तंत्र-मंत्र सीखने वाले साधक गुप्त नवरात्रि में भी मां छिन्नमस्ता की कठिन भक्ति करते हैं। ये दस महाविद्याओं की छठी देवी हैं। सनातन शास्त्र में मां छिन्नमस्ता को सर्व सिद्धि पूर्ण करने वाली अधिष्ठात्री कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं तत्काल पूर्ण होती हैं। इसके लिए साधक श्रद्धा भाव से मां छिन्नमस्ता की पूजा, जप एवं तप करते हैं। आइए, छिन्नमस्ता जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानते हैं-

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    महत्व

    सनातन धर्म में छिन्नमस्ता जयंती का विशेष महत्व है। गुप्त ज्ञान सीखने वाले साधकों के लिए यह दिन उत्सव जैसा रहता है। इस अवसर पर मां के दरबार को अच्छे से सजाया जाता है। भक्तगण अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं। मंदिरों में मां दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन किया जाता है। साथ ही मंदिर परिसर के बाहर साधक भंडारा करते हैं। मां की पूजा करने से भक्तों की चिंता दूर हो जाती है। इसके लिए मां को चिंतपूर्णी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से मैया के दरबार आता है। उसकी हर मनोकामना मैया की कृपा से अवश्य पूरी होती है।

    पूजा विधि

    इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले मैया का ध्यान कर दिन की शुरुआत करें। फिर घर की साफ-सफाई अच्छे से करें। इसके पश्चात, गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें और लाल रंग का नवीन वस्त्र धारण करें। फिर, हाथ में जल लेकर आचमन कर खुद को शुद्ध करें। इसके बाद दाहिने हाथ में लाल पुष्प रख व्रत संकल्प लें। अब एक चौकी पर मैया की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर मां को श्रृंगार का सामान भेंट करें। इसके बाद फल, फूल, धूप-दीप, कुमकुम, अक्षत और मिष्ठान भेंट करें। अंत में आरती अर्चना कर सुख, शांति और धन की कामना करें। आप गुप्ता इच्छा की भी कामना कर सकते हैं। दिनभर उपवास रखें। शाम में आरती के बाद फलाहार करें।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'